पुरुष के मंचन से शोहन कोलकाता का नाट्य समारोह आरंभ

कोलकाता। ऐतिहासिक मिनर्वा थिएटर में शोहन के नाट्य समारोह की शुरुआत अनुकृति रंगमंडल कानपुर की प्रस्तुति पुरुष से हुई। जयवंत दलवी के इस मराठी नाटक का हिन्दी रुपांतरण सुधाकर करकरे और निर्देशन निशा वर्मा ने किया।

नाटक पुरुष की शुरूआत होती है अण्णा साहब आप्टे के घर से जो एक आदर्श शिक्षक हैं। उनकी अपनी पत्नी तारा के साथ कुछ वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन वह हमेशा उनका साथ भी देती है। अण्णा की बेटी अंबिका एक स्कूल में पढ़ाती है। उसका एक दोस्त है सिद्धार्थ, जो दलितों के हक की लड़ाई लड़ता है। तभी नाटक में प्रवेश होता है बाहुबली नेता गुलाबराय जाधव का, जिसके काले-कारनामों को अंबिका कई बार उजागर कर चुकी है। गुलाबराय अंबिका से बदला लेने के लिए उसको धोखे से डाक बंगले में बुलाकर बलात्कार कर देता है। अंबिका को सामाजिक प्रताड़ना तो सहनी ही पड़ती है, अदालत से भी न्याय नहीं मिलता। सदमे से क्षुब्ध अंबिका की मां तारा आत्महत्या कर लेती है। मुश्किल घड़ी में सिद्धार्थ भी साथ छोड़ देता है। अब अंबिका को अपनी लड़ाई अकेले लड़नी है और वह गुलाबराव को जीवन भर याद रखने वाला सबक सिखाती है। नाटक के अंतिम दृश्य में अंबिका पुलिस को कॉल करती है। इंस्पेक्टर गॉडगिल पूछते हैं  ‘क्या तुमने गुलाबराव को मार डाला। अंबिका कहती है नहीं, मैंने उसका पुरुषत्व हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर डाला।’ इसी के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।

नाटक में महेंद्र धुरिया, राजीव तिवारी, जोली घोष, सुरेश श्रीवास्तव, आनामिका जायसवाल, दीपिका सिंह, स्वयं कुमार, मनोहर सुखेजा, शुभी मेहरोत्रा, अनिल निगम, सम्राट यादव व विजय भास्कर ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। प्रस्तुति नियंत्रक व सहायक निर्देशक डा. ओमेंद्र कुमार थे। संगीत सिरीष सिन्हा व सलाहकार निर्देशक कृष्णा सक्सेना थे।

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