उरई। आटा थाने के जौराखेरा ग्राम के प्रधान के खिलाफ गांव के बांशिदों ने पुलिस अधीक्षक के सामने गंभीर आरोप लगाये हैं। उन्होंने आटा थाने के क्षेत्रीय दरोगा की उनसे सांठगांठ बताई और कहा कि इसके कारण प्रधान के खिलाफ सही जांच नही हो पा रही है और उनका दमन कराया जा रहा है।
जौराखेरा निवासी महिपाल सिंह व उनके साथ आये रामअवतार, दर्शन सिंह, अंकुर सिंह, मलखान, मनोज कुमार, रामनारायण, चंद्रभूषण, भरत कुमार, रामखिलावन, मनीष सिंह आदि ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद सिंह से भेंट की। उन्होंने इस दौरान आरोप लगाया कि उनके गांव का प्रधान राकेश कुमार अपनी दबंगी और शहजोरी से गांव वालों को आतंकित किये हुए है। यहां तक कि लोगों की बहुओं-बेटियों की अस्मत तक सुरक्षित नही है। कई लोग गांव छोड़कर भाग चुके हैं।
महिपाल सिंह ने कहा कि वे स्वयं प्रधान के अत्याचार के भुक्तभोगी हैं। उनकी भतीजी की हत्या कर दी गई। जिसकी सही जांच करने की बजाय आटा पुलिस ने उन्हीं के घर में छापामारी की। इस दौरान पुलिस द्वारा जमकर तांडव किया गया। रहम के लिए सिफारिश कराने पर दरोगा ने 30 हजार रुपये की मांग कर दी। उन्होंने सीजीएम कोर्ट में अर्जी डालकर थाने से आख्या मंगवाई तो पता चला कि वे किसी केस में वांछित नही हैं।
पराकाष्ठा तो यह है कि उनके द्वारा बनवाये गये तालाब पर भी प्रधान ने कब्जा कर लिया है। जिसमें उनका मत्स्य पालन का पटटा है। लेकिन प्रधान ने जहर डलवाकर उसकी सारी मछलियां मरवां दीं। इस हालत में उसे तालाब का हर साल साढ़ आठ हजार रुपये राजस्व अलग देना पड़ रहा है।
पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों की आपबीती सुनने के बाद कालपी के पुलिस उपाधीक्षक को अपने स्तर से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अगर अरोप सहीं हैं तो प्रधान के खिलाफ कार्रवाई होगी।






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