उरई। स्कूल चलो अभियान के श्रीगणेश में ही अपशकुनों की भरमार देखने को मिली। शुक्रवार को सुबह साढ़े आठ बजे बच्चों की स्कूल चलो रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाना था। लेकिन अतिथि सजने-संवरने में देरी लग जाने के कारण साढ़े नौ बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे। तब तक बच्चे टेसू की तरह उनके इंतजार में खड़े रहे। इसके बाद जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर और तीनों विधायक मौके पर अवतरित हुए। जिलाधिकारी ने रैली को हरी झंडी दिखाई।

डिमांड थी शिक्षक स्कूल चलो रैली की
इस दौरान अतिथि बच्चों को प्रवचन की घुटटी पिलाने से भी नही चूंके। हर बच्चे से जिसकी उम्र हो गई है स्कूल में दाखिला लेने की बात कही गई और उनके अभिभावकों से इसके लिए जागरूक रहने की गुजारिश की गई। दूसरी ओर इस तमाशे को देख रहे सयानों का कहना था कि बच्चों की स्कूल चलो रैली निकालने की बजाय शिक्षकों की स्कूल चलो रैली निकालनी चाहिए थी। जिन्हें वर्तमान जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश शाही खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से वसूली करके जब मर्जी हो तभी स्कूल पहुंचने की छुटटी दिये हुए हैं।

शिक्षक सपूतों ने पालने मे ही दिखाये पांव
गत सत्र की यह पुनरावृत्ति इस सत्र में भी जारी रहेगी क्योंकि आज की रैली में पूत के पांव पालने में ही दिख गये। रैली की शुरूआत के समय नगर क्षेत्र के 100-125 शिक्षक एकत्रित थे। जिन्होंने कलेक्ट्रेट में ही रैली के समय अपनी उपस्थिति के सुबूत के लिए सैल्फी ली और इसके बाद मोटर साइकिल स्टार्ट कर पीछे के गेट से दफा हो गये। वास्तविक रूप से रैली के प्रस्थान के समय केवल 30-35 शिक्षक दिखाई दे रहे थे। अवतारी अतिथि भी बच्चों के साथ जिला पंचायत गेट तक ही चल पाये। इसके बाद गोड़े थक जाने से वे अपने गाड़ियों में बैठकर रफूचक्कर हो गये। अलबत्ता मासूमों को अंबेडकर चैराहा, भगत सिंह चैराहा होते हुए बीएसए कार्यालय तक लंबी परेड करनी पड़ी।

मंशापूर्ण हनुमान जी को प्रणाम करना अधिकारियों के काम आया
आज सुबह से ही मौसम गर्मी से धधकने लगा था। जिससे बच्चों को यह परेड मुश्किल पड़ गई। उनके हलक सूख रहे थे लेकिन पानी का कोई इंतजाम नही था। रैली में जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश शाही ने बांसों वाले पुल पर पहुंचकर मंशापूर्ण हनुमानजी को प्रमाण करते हुए प्रार्थना कर ली थी कि बच्चों को बीएसए दफ्तर पहुंचने तक बचाये रखना तांकि उनकी नौकरी पर कोई संकट न आये। बदले में वे शनिवार को उन्हें चोला चढ़ायेगें। इसलिए गनीमत रही कि किसी बच्चे की तबियत इतनी लंबी पद यात्रा में ऐसी नही बिगड़ी कि उनके जबाव-तलब की नौबत आ जाती।

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