सिरसाकलार-उरई। गांव के मुख्य रास्ते से लोग दलदल में घुसकर बाहर निकल पाते हैं। दलदल के कारण मच्छरों का साम्राज्य लोगों को रात में सोने नही देता। गांव की इस बदहाली पर स्थानीय बाशिंदों में आक्रोश छाया हुआ है।
सिरसाकलार कस्बा आज एक बड़े ग्रोथ सेंटर के रूप में उभर रहा है। दूसरी ओर इसके विकास की अनदेखी कर कस्बे की उज्जवल संभावनाओं पर कुठाराघात किया जा रहा है।
गांव के बाशिंदें गुडडू कुरैशी, राजकुमार बबेड़िया, सबद अली, रविकांत, असगर अली आदि ने बताया कि गांव के बाशिंदे आईएएस आरबी भास्कर जब प्रदेश में नौकरशाही के शीर्ष पर थे तो उन्होंने मुख्य मार्ग का 20 वर्ष पहले अपने प्रभाव से डामरीकरण करा दिया था। जिससे लोगों को काफी सहूलियत मिली थी। लेकिन इसके बाद किसी ने सिरसाकलार की परवाह नही की।
इसी मुख्य मार्ग से होकर थाना, बिजलीघर, कन्या पाठशाला और देवी मंदिर जाना पड़ता है। दलदल के कारण लोग कीचड़ में सनकर मंदिर में पहुंचते हैं तो उनका मन खिन्न हो जाता है। बुजुर्ग जब तक कोई सहारा न दे इस रास्ते से निकल नही पाते। इतनी बदहाली के बावजूद कोई गौर करने वाला नही है। जबकि सांसद और विधायक दोनों सत्तारूढ पार्टी के हैं। इसके कारण लोगों मे ंजबर्दस्त रोष छाया हुआ है।
हालांकि जिला पंचायत सदस्य रामकुमार गुप्ता ने बताया कि पूरा रास्ता केवल 60 मीटर का है जिसे पक्का कराने के लिए बजट पास हो चुका है जैसे ही धनराशि निर्गत होगी कार्य शुरू करा दिया जायेगा।







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