इटावा। काबू से बाहर दुराग्रही समर्थकों के कारण भाजपा हाईकमान की दलित प्रबंधन की मुहिम फिर हिचकोले खाने लगी है। यहां के मुखर पार्टी सांसद अशोक दोहरे के खिलाफ सोशल मीडिया पर भाजपा के समर्थक आग उगलने में लगे हैं। जबकि उनके बगावती सुरों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ आकर उनको साधा था। जिससे उनके सुर काफी हद तक बदल गये थे।
2 अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान हुई घटनाओं को लेकर दमनात्मक कार्रवाइयों से प्रदेश में भाजपा के अनुसूचित जाति के कई सांसद विफर गये थे। इनमें अशोक दोहरे, सावित्री बाई फुले व छोटेलाल मुख्य थे। इन सांसदों का आरोप था कि पुलिस कार्रवाई के नाम पर दलितों को झूठे मुकदमें में फसा रही है और उन पर मुकदमें लाद रही है।
दलितों के बीच भाजपा के लिए गुस्सा बढ़ने के राजनीतिक दुष्परिणामों का अंदाजा करके अमित शाह फौरन क्षति प्रबंधन के लिए लखनऊ पहुंचे। इसके बाद अशोक दोहरे ने प्रधानमंत्री के आवाहन पर विपक्ष के रवैये के कारण संसद ठप्प रहने को लेकर आयोजित अवकाश में भागीदारी की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सहित कई प्रमुख नेता दलितों के यहां भोजन करने पहुंचे। दलितों को साधने की भाजपा की यह मुहिम रंग लाती दिखने लगी थी लेकिन पार्टी के ही कार्यकर्ताओं का एक वर्ग दलितों को हैसियत में रखने की ठाने हुए है जिससे हाईकमान की पूरी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इटावा में ऐसे कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अशोक दोहरे को अपमानित करने की जंग छेड़ दी है। उनकी मायावती के पैर छूते हुए तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की गई हैं। फेसबुक पर उनके खिलाफ जमकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है। इस बीच कुछ दिनों की खामोशी के बाद गुरुवार को फिर बहराइच के सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा हाईकमान को परेशानी में डालने वाला बयान दे डाला। जातिगत द्वंद की अखाड़ेबाजी के चलते भाजपा नेतृत्व के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। गौरतलब है िकइस बीच राज्य में एक लोक सभा और एक विधानसभा उपचुनाव की तिथियां चुनाव आयोग ने घोषित कर दी हैं। जिसमें भाजपा नेतृत्व को डर सता रहा है कि कहीं विपक्ष फिर गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव जैसी पटखनी उसे न दे डाले।

Leave a comment