
0 सुविधा शुल्क के बावजूद भी नही पाया एक टका
0 लेखाधिकारी उच्चाधिकारियों का हिस्सा होने की धमकी देकर लेता है रिश्वत
उरई। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी है इसका अंदाजाएक परिचारक के 23 वर्ष के वेतन अवशेष के भुगतान न होने से लगाया जा सकता है। कि लेखाधिकारी ने केवल रिश्वत की मांग पूरी न होने पर एक कालेज के परिचारक को 1993 से 2016 तक वेतन से हाथ नही लगाने दिया। जबकि परिचारक ने सुविधा शुल्क भी मुहैया करा दिया। यहां तक कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने वेतन भुगतान का आदेश भी किया लेकिन लेखाधिकारी के भ्रष्ट रवैये ने आज तक परिचारक को वेतन से बेदखल कर रखा।
बीएमटी इंटर कालेज आटा के परिचारक बीरेन्द्र कुमार ने जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि वह एक मई सन 1992 से बीएमटी इंटर कालेज आटा जालौन में परिचारक के पद पर कार्यरत है। प्रार्थी को 19 फरवरी 1993 से पांच अप्रैल 2016 तक का अवशेष भुगतान आज तक नही हुआ। इसकी वजह परिचारक ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी सचिन दीक्षित का भ्रष्ट रवैया है। परिचारक बीरेन्द्र कुमार ने यह भी बताया कि लेखाधिकारी सचिन दीक्षित ने उससे सुविधा शुल्क और अधिकारियों के नाम पर पैसा लेकर दो दिन में वेतन भुगतान करने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन भुगतान आज तक नही हुआ। परिचारक बीरेन्द्र कुमार ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षामंत्री, प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त झांसी, शिक्षा निदेशक लखनऊ, को भी पत्र भेजे है। परिचारक ने पत्रों में साफ तौर पर लिखा है कि उसके मामले को अगर शासन प्रशासन गंभीरता से नही लेता तो वह आत्महत्या के लिये मजबूर हो जाएगा। जिसका पूरा दायित्व लेखाधिकारी सचिन दीक्षित पर होगा। परिचारक बीरेन्द कुमार ने अपनी नौकरी के 23 वर्ष के वेतन भुगतान न होने का पूरा दोषी लेखाधिकारी को ठहराया और लेखाधिकारी को लंबे समय से भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप भी लगाया है।







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