0 मामला बगैर काउंसलिंग के अंग्रेजी मीडियम विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती का

0 शिक्षकों ने की थी जिलाधिकारी से लिखित शिकायत

उरई । एक ओर जहां प्रदेश सरकार हर कार्य को पारदर्शी व्यवस्था के तहत करने की ओर आगे बढ़ रही है तो वहीं दूसरी ओर शासन की इस नीति को पलीता लगाने के लिये जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार शाही स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्य करते हुये अपनी ‘‘नजराना’’ नीति पर चल पड़े हैं। तो सुकराना और हकराना नीति अपनाने के लिये उन्होंने अधीनस्थों को प्रेरित कर दिया है।

हाल ही में प्रदेश सरकार ने जिले के 65 परिषदीय विद्यालयों का चयन करते हुये उनमें अंग्रेजी माध्यम से नये सत्र से पढ़ाई कराने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है। ऐसे अंग्रेजी माध्यम के लिये चयनित विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के लिये पिछले दिनों परीक्षा भी आयोजित करायी गयी थी। इसके बाद परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले शिक्षकों की काउंसलिंग कराने के बाद उन्हें अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनात किया जाना था। लेकिन बीएसए ने परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों की काउंसलिंग कराना जरूरी नहीं समझा और अपनी स्वेच्छाचारिता दिखाते हुये उन्होंने ‘‘नजराना’’ नीति अपनाना बेहतर समझा। इसी के साथ उन्होंने चयनित अंग्रेजी माध्यम के मनचाहे विद्यालयों में तैनाती के लिये अपनी डिमांड भी फिक्स कर दी साथ ही शर्त लगा दी कि पहले आओ, पहले पाओ। यानि जो शिक्षक मनचाहे विद्यालयों में तैनाती चाहते हैं वह नजराना नीति का फालो करें तो उन्हें उनके मनपसंद विद्यालय में तैनाती दे दी जायेगी। जैसे ही उक्त जानकारी परीक्षा में उत्तीर्ण शिक्षक मो. अजीम, रेवतीरमन द्विवेदी, अरविंद स्पर्णकार, राघवेंद्र प्रताप, सुषमा वर्मा को पता चली तो उन्होंने उसकी शिकायत जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर से कर दी। तो जांच के दौरान बीएसए की नजराना वसूली नीति का खुलासा हो गया। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश शाही बैकफुट पर आ गये और फिर उन्होंने अपने अधीनस्थों के माध्यम से शिकायत करने वाले शिक्षकों को कार्यालय में बुलाया और उन्हें धमकी दी कि तुम लोग यह लिखकर दे दो कि शिकायत हम लोगों ने नहीं की है। यदि हमारा कहना नहीं माना तो नौकरी कैसे की जाती है यह समझ में आ जायेगा। बीएसए के यह शब्द सुनकर शिकायत करने वाले शिक्षकों ने भी एक स्वर से कह डाला कि वह शिकायत को किसी कीमत पर वापस नहीं लेंगे और न ही कुछ भी लिखकर देंगे।

तो वहीं कार्यालय सूत्रों की मानें तो बीएसए कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक जिसे पूर्व के समय में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उसका जनपद से कृष्णमुख कर दिया गया था। लेकिन उसने जुगाड़ लगाकर पुनः बीएसए कार्यालय में अपना स्थानांतरण करा लिया ताकि वह पूर्व की भांति बीएसए कार्यालय को अपने सिस्टम से चलाता रहे। अब देखे वाली बात यह होगी कि क्या बीएसए परीक्षा में उत्तीर्ण हुये शिक्षकों की काउंसलिंग के आधार पर अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनाती देंगे या फिर अपनी नजराना नीति पर चलेंगे यह तो समय ही बतायेगा।

 

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