0 कुठौंद क्षेत्र में एक महिला की मौत
0 कदौरा क्षेत्र के निस्बापुर में 25 घर जले, सारे रास्ते हुए जाम
उरई। बुधवार की रात जिले भर में तेज बारिश के साथ तूफान में जमकर तबाही मचाई। सैंकड़ों की संख्या में पेड़ आंधी के कारण जड़ से उखड़ गये। जिसकी वजह से जगह-जगह रास्ते जाम हो गये। कुठौंद थाना क्षेत्र में एक महिला की मौत दीवाल गिर जाने से हो गई। कदौरा थाना क्षेत्र के एक गांव में चूल्हे की चिंगारी तेज हवा में घरों में गिरी जिससे आधा गांव आग की लपटों से घिर गया और लगभग 25 घरों में नगदी, गल्ला, जेवर सहित सारा सामान खाक हो गया। कई जगह मांगलिक कार्यक्रम हो रहे थे। आंधी-पानी की वजह से उनमें रंग में भंग हो गया।
बीती रात लगभग 10 बजे मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया। इसके पहले दिन भर तेज धूप निकली रही थी जिससे मौसम गर्म था। लेकिन 10 बजते-बजते आसमान पर काली घटायें उमड़ने लगी और भयावह तरीके से बिजली तड़कने लगी। इसके बाद बारिश के बीच हाहाकार की तरह अंधड़ मचल पड़ा। कई जगह तिलक के मांगलिक कार्यक्रम आयोजित थे, जहां शामियाने उखड़ गये। पंगतों में अफरा-तफरी मच गई। तूफान की यह तांडव लीला एक से डेढ़ घंटे तक जारी रही। आंधी का वेग बहुत ज्यादा होने से बड़े-बड़े दरख्त उखड़कर दूर-दूर तक बिखर गये। इसके कारण सड़कों पर आवागमन अवरुद्ध हो गया। बहुत से लोग रास्ते में फंसे जान की खैर मांगते रहे।
इसी दौरान कुठौंद थाने के करमुखा गांव में दीवाल गिर जाने से उसके नीचे दबकर राजेश्वरी (45वर्ष) पत्नी गेंदालाल की मौत हो गई। सबसे भीषड़ नुकसान कदौरा थाने के निस्बापुर गांव में हुआ। जहां आंधी की आमद के समय सुंदर प्रजापति के घर में चूल्हे पर खाना बन रहा था। हवा के कारण चूल्हे से उठी चिंगारी गांव में कच्चे घरों के ऊपर गिरी और इससे इतनी तेजी से आग फैली कि आधा गांव उसकी जद में आ गया। बाबूराम कुशवाहा, सुंदर प्रजापति, मंटू, श्रीचंद्र, महेश, फूलसिंह, मयंक, फक्कड़, रामकेशरी, रज्जन, गुल्ला, किसना, महेंद्र, प्रमोद कुमार, उमाकांत, हरीमोहन, विपिन, सुनील, संतोष, काशीराम और रमेश के घर अग्निकांड के इस तांडव की भेंट चढ़ गये। इस विनाश लीला में लगभग 50 लाख की संपत्ति जलकर खाक हो गयी। खबर पाकर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची तो रास्ते में टूटे पेड़ और खंभे पड़ होने से उसे मौके तक पहुंचने का रास्ता नही मिल पाया।
आंधी के कारण जालौन-औरैया मार्ग पर पेड़ों के सड़क पर गिर जाने से सबसे ज्यादा जाम रहा। वाहनों में आ रहे लोग इसके कारण घंटों रास्ते में फंसे रहे और पेड़ हटाने की मशक्कत करते रहे। डकोर क्षेत्र में सौर ऊर्जा की सारी प्लेटे आंधी के झोंकों में तिनके तरह उड़ गई। राठ रोड स्थित गुरुकुलम स्कूल में भी सौर ऊर्जा प्लेटों का भी यही हाल हुआ। तार और खंभे टूटने से रात भर पूरे जिले में बिजली की आपूर्ति ठप्प रही। कई क्षेत्रों में तो एक हफ्ते तक बिजली की आपूर्ति शुरू न हो पाने के आसार बन गये हैं। इसी बीच कालपी क्षेत्र के धरमपुर गांव में भी आंधी के कारण आग लगने की जानकारी मिली है जिसमें लगभग एक दर्जन घरों में नुकसान हुआ है। तूफान से हुए नुकसान का विवरण आना अभी लगातार जारी है।






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