उरई। एससी/एसटी टीचर्स बेलफेयर एसोसिएशन ने गुरुवार को राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा जिसमें अनुसूचित वर्ग के शिक्षकों को रिवर्ट कर उनके वेतन फ्रीज किये जाने की कार्रवाई पर आक्रोश जताया गया है।
ज्ञापन में 1992 में दिये गये इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस का हवाला दिया गया। जिसके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि शिक्षकों में अनुसूचित जाति का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पांच वर्ष के अंदर पूर्ण किया जाये। लेकिन उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने इस निर्देश का पालन करने में कोई रुचि नही दिखाई। ज्ञापन में अन्य प्रकरणों का हवाला दिया गया। एससी/एसटी टीचर्स बेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद अदालत के आदेशों की अपने तरीके से व्याख्या कर रही है तांकि अनुसूचित जाति के शिक्षकों के हितों की अनदेखी के उसके कदम सही साबित होते रहें। एसोसिएशन का कहना है कि मुख्य धारा के जो शिक्षक संगठन हैं उनमें अनुसूचित जाति के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व नगण्य है। इसलिए वे भी उनके विरुद्ध साजिश में शरीक हो जाते हैं। होना यह चाहिए कि इस विसंगति के निराकरण के लिए सरकार एससी/एसटी टीचर्स बेलफेयर एसोसिएशन को अलग से मान्यता दे।
ज्ञापने देने पहुंचे प्रतिनिधि मंड़ल में केके शिरोमणि, सुंदर शास्त्री, राजेश चौधरी, ओमप्रकाश गौतम, अनिल ओमरे, अरविंद खाबरी, रामअवतार सिंह, रामकुमार गौतम, सुनील चौधरी, अरविंद्र कुमार, मिस्टर सिंह, सुभाष चंद्र, उपयभानु शिव प्रसाद वर्मा, वीरेंद्र बौद्ध, गजेंद्र गौतम, उमाशंकर भास्कर, रमाकांत शाक्यवार, रविंद्र कुमार, दीनदयाल श्रीवास, श्रद्धानंद सिंह, भूपेंद्र सिंह, रामकिशोर वर्मा, कौशल किशोर, राकेश कुमार, संतराम और महाराज सिंह शामिल रहे।






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