उरई। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जनपदीय इकाई के प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार को जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश शाही से विभिन्न मुददों पर आमने-सामने बात की। इनमें सबसे मुख्य मुददा खण्ड शिक्षाधिकारी विनोद गौतम के रवैये का रहा। जिन पर बेसिक शिक्षाधिकारी की नजरें इनायत शुरू से सामने आती रही हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि जालौन में उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ महासंघ द्वारा संघर्ष का बिगुल बचाने पर जब 21 मार्च को उन्हें बीएसए दफ्तर में संबंद्ध किया गया तो सुधरने की बजाय उन्होंने और ज्यादा हेकड़ी दिखाते हुए एक भी दिन कार्यालय आना गंवारा नही किया और न ही हाजिरी रजिस्टर पर दस्तखत किये। इस बीच 25 अप्रैल को वे अचानक कार्यालय आ धमके और उन्होंने एक साथ सारे कार्य दिवसों में हस्ताक्षर बना डाले।
आश्चर्य की बात यह है कि लेन-देन के लिए अपना जमीर बेंच चुके बीएसए ने न तो विनोद गौतम के इस कृत्य पर कोई आपत्ति दर्शाई और न ही एफआईआर दर्ज कराने की जहमत उठाई। महासंघ ने आज की मुलाकात में बीएसए को उनकी करतूत का आइना दिखाने के लिए उपस्थिति पंजिका में विनोद गौतम द्वार हस्ताक्षर करने के पूर्व की और हस्ताक्षर करने के बाद की छाया प्रतियां अपने ज्ञापन के साथ सौंपीं और कहा कि साहब जरा भी गैरत है तो अब आप विनोद गौतम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाई करें और एफआईआर दर्ज करायें। देखना है कि बीएसए इसके बावजूद कोई जलालत महसूस करते है या अपनी खाल को किसी भी गैडें से ज्यादा चिकनी और मोटी साबित करते हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने पदोन्नति हेतु 30 अप्रैल को अंतिम वरिष्ठता सूची जारी न की आने की ओर भी बीएसए का ध्यानाकर्षित कराया। मांग की कि अमान्य विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई कर ऐसे विद्यालय बंद कराये जायें जिससे परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ सकें। कहा गया कि समय-समय पर मिलने वाले निर्देशों के बावजूद कार्यालयों में संबंद्ध अध्यापकों को मूल विद्यालय के लिए कार्यमुक्त नही किया जा रहा है जिससे संबंधित विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
एक अन्य मांग में आग्रह किया गया है कि जीपीएफ पासबुकों को अपडेट कराया जाये व नई पेंशन योजना के दायरे में शामिल शिक्षकों की पेंशन कटौतियों का ब्यौरा रखने हेतु जीपीएफ पासबुकों की तरह एनपीएस पासबुकें बनवाई जायें। बीआरसी सह समन्वयकों की परीक्षा का परिणाम अतिशीघ्र घोषित कर लंबित चयन प्रक्रिया दूर करने, ग्रीष्मावकाश में लिये गये कार्य के बदले उपार्जित अवकाश स्वीकृत कर सेवा पुस्तिका में अंकित करने के लिए खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित करने और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय व खंड कार्यालयों में शासन की मंशा के अनुरूप विभिन्न पटलों के कार्य पूर्ण पारिदर्शिता के साथ समय से पूर्ण कराने हेतु सिटीजन चार्टर की व्यवस्था अबिलंब लागू करने की भी मांग की गई।
प्रतिनिधि मंडल में महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र राजपूत, महामंत्री प्रदीप सिंह चौहान, संघर्ष समिति के अध्यक्ष इलियास मंसूरी, कार्यवाहक महामंत्री अरुण पांचाल, सरंक्षक प्रकाश नारायण पाठक, जिला प्रभारी अरविंद नगायच, अशोक तिवारी, बृजेश श्रीवास्तव, सुरेश वर्मा, विकास गुप्ता, संतोष विश्वकर्मा, सुशील राजपूत, अरविंद स्वर्णकार, राजेश गुप्ता, अरविंद निरंजन, अयूब कुरैशी, अजहर अंसारी, रियायत वेग, अवधेश पाण्डेय, सोएब अंसारी, राजेंद्र स्वर्णकार, तनवीर अहमद, शैलेंद्र वर्मा, देवेंद्र श्रीवास्तव, मनोज गुप्ता, मजरुल हसन और श्यामजी गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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