0 साधु सम्प्रदाय ने बैठक कर कालपी मंदिर कारकारिणी की औपचारिक घोषणा की
कलपी-उरई। विख्यात हिन्दू धर्म स्थल बड़ा स्थान मंदिर कालपी महामण्लेश्वर 1008 बरसाना की गददी प्रमुख शिष्य रामकरन दास का सर्वसम्मत से मनोनीत किया गया है। संत समाज की मीटिंग में मंदिर की कार्यकारिणी का गढन किया गया है। ज्ञात हो कि डोगरा गददी गुजरात वैश्णव रामानंद श्री सम्प्रदाय बड़ा स्थान कालपी के पूर्व महामडलेश्वर 1008 श्री महंत जयराम दास का विगतवर्शी में कनधन होने पर रामकिशोर को महान्ताई गददी सौपी गई थी। मंहत रामकिषोर के गुरू भाई मंहत रामदास बरसाना मथुरा आश्रम का संचालन करने में सक्रिय रहे। बीते दिनों चार मई को मंहत रामकिशोर दास ब्रहम्लीन हो गये। उनकी गददी की ताजपोषी की धार्मिक प्रक्रिया अपनाई गई। चूंकि मंहत रामकरन दास जी, स्व. मंहत रामकिषोर दास के ज्येश्ट गुरूभाई होने के कारण सबसे योग्यता के रूप में अव्वल माने गये। बीते दिन मंदिर परिसर में शाहजहापुर के मंहत चेतनदास जी, कसाल हरियाणा के मंहत दयाराम दास जी, सुरावली कसाल के मंहत विश्राम दास जी, पिपंराया मंहत जयराम दास जी, घौसा गुजरात मंहत भरतदास जी, छानी के मंहत देवीदास त्यागी सहित श्री सम्प्रदास के संतो की मौजूदगी में आयोजित बैठक में मंहत रामकरन दास जी को महामंडलेष्वर 1008 के लिये चयनित किया गया। अधिकारी पद अमरदास जी पुजारी पद पर कोठारी का पद, क्षमादास जी कोलवाली पद तथा लालदास जी को इन्क्वारी के पद पर चयनित किया है। म्ंाहत दयाराम दास जी मंहत करनाल ने बताया कि 18 मई को ब्रहमलीन महामण्डेलश्वर रामकिषोर दास जी की यादगार में आयाोजित होने वाले भंडारा में दस हजार भक्त हिस्सा लेगें। जिनमें एक हजार संत शामिल होगे। उसी दिन नये महामंडलेष्वर मंहत रामकरन दास जी सहित सभी जिम्मेंदार धर्मगुरूओं के पदो की घोशणा होगी। भंडार का व्यय मंहत रामकरन दास करेगे।
बलरामदास की राह में रोड़ा
बड़ा स्थान मंदिर कालपी के सेवक बाबा बलराम दास के उपर आपराधिक घटना का मुकदमें ने महामंडलेष्वर बनने की राह में रोडा अटक गया। जालौन के ग्राम सिहारी दाउदपुर के निवासी बलराम दास बाबा की पत्नी की हत्या के आरोप में न्यायलय से सजा मिली है तथा उच्च न्यायलय से जमानत पर चल रहे है। मंदिर में करीब 350 बीघा जमीन होने से संचालन व्यवस्था अच्छी होती है। नौ महीने तक निवर्तमान महामंडलेष्वर दिल्ली में उपचार कराते रहे और उनके इलाज कराने में गुरू भाई बराबर मौजूद रहे। संतो ने र्वातलाप कि महामंडेलश्वर की इलाज की वजह से दिल्ली में होने के कारण मंदिर की अर्थव्यवस्था भी खोखली कर दी गई।






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