कालपी-उरई। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से कालपी में वृक्षों की कटान तथा ढुलाई करने का अवैध धंधा खूब फल-फूल रहा है। बीते 2 मई को प्रचंड आंधी के प्रकोप से भले ही जन हानि एव धन हानि हुई हो लेकिन वन माफियाओं लेकिन कर्मचारियों की चांदी हो गई है। सुवह 3 बजे से ट्रैक्टर तथा पिकअप वाहनों से वन माफिया अवैध लकड़ी की ढुलाई करने के लिए धड़ल्ले से लिप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते दो मई की रात को प्रचंड आंधी के कहर से मगरौल तथा आसपास के क्षेत्रो में सैकड़ों वृक्ष टूट कर गिर गए थे। फलस्वरूप इन टूटे वृक्षों की लकड़िया पर माफियाओं की नजर टेढ़ी हो गई। 3 मई से अभी तक दर्जनों वाहनों में अवैध ढंग से लकड़िया लोड करके कालपी तथा आसपास की मंडियों में पहुंचाई जा रही है। वन माफिया तथा ट्रैक्टर माफिया अवैध रूप से चोरी करके जंगल तथा निजी भूमि से लकड़ी के कारोबार के धंधे में लिप्त हो गए । दिलचस्प बात यह है 2 मई से 10 मई तक लकड़ियों के परिवहन को लेकर वन विभाग के द्वारा एक भी निकासी के प्रपत्र जारी नहीं किया गया है। हीरापुर, देवकली, मैनपुर, मगरौल, तिगड़ेश्वर, गड़ी तगा आदि जंगलों से बीते एक सप्ताह से सैकड़ों ट्रैक्टर मे वृक्षों की लकड़िया ले जा कर कालपी तथा पुखराया की मंडियों में बेची जा रही है। क्षेत्रीय पुलिस, उत्तर प्रदेश डायल 100 तथा वन विभाग के जिम्मेदारों की नाक के नीचे प्रतिदिन लकड़िया लाद कर ट्रैक्टरों तथा अन्य वाहनों को मेन सड़कों से निकाला जा रहा है । इस मामले में कालपी मांगरौल रोड कुख्यात हो चुका है। एक वन माफिया रात्रि दो बजे से मोटरसाइकिल में भ्रमण करके लोकेशन में जुट जाता है। तथा लोकेशन के आधार पर मगरौल, कालपी रोड से लकड़िया भरे ट्रैक्टर धड़ल्ले से टोकन देकर निकलवाता रहता है । बदले में मोटी रकम की कमाई का जरिया बनाए हुए हैं। महेवा गांव का निवासी एक वाचर तरक्की पाकर अब फारेस्ट गार्ड बन गया है। तथा लगातार 10 वर्षों से कालपी वन विभाग में तैनात है। निजी दो ट्रेक्टर चलवाकर फारेस्ट गार्ड जंगल तथा निजी भूमि से अवैधानिक ढंग से पेड़ कटवाकर तथा ट्रैक्टर से लदवा कर मोटी कमाई करने में जुटा हुआ है। इधर वृक्षों की लगातार कत्लेआम करने मे पूरा काकस जुटा है।अगर गहनता से जांच करा दी जाये तो राडार मे सफेद पोश, बर्दीधारी तथा बिभागो के भेड़ियों के नाम सामने आ सकते हैं। संपर्क करने पर क्षेत्राधिकारी से संपर्क नहीं हो सका बताया जाता है कि क्षेत्राधिकारी ज्यादातर समय इटावा, लखनऊ तथा उरई में बिताते हैं। वन विभाग की अवैध कटान की लकड़ियां तथा वृक्षो का कत्लेआम पर नियंत्रण करने हेतु उच्च अधिकारियों से अपेक्षा की गई है।

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