उरई। जिला सहकारी बैंक में विरोधियों की व्यूह रचना को विफल करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष उदय सिंह पिण्डारी सभापति की कुर्सी पर अपनी ताजपोशी कराने मे ंसफल हो गये। उनके नायक राकेश तिवारी जेके हाउस उप सभापति के रूप में इंतिखाब हुए।
गुरुवार को संचालक के पदो ंके परिणाम सामने आने के बाद ही उदय पिण्डारी का सभापति बनने का रास्ता साफ हो गया था। शुक्रवार को नामांकन के समय जब कोई उनके खिलाफ पर्चा भरने के लिए सामने नही आया तो चुनाव अधिकारी एसडीएम कालपी सतीश चंद्र ने उन्हें और राकेश तिवारी को क्रमशः सभापति व उप सभापति पद पर निर्विरोध निर्वाचित किये जाने की घोषणा करते हुए प्रमाण पत्र थमा दिये।
विदित हो कि उदय पिण्डारी भले ही निर्विरोध सभापति बन गये हों लेकिन उनके लिए चुनाव आसान नही रहा। उन्हें हराने के लिए कड़ी व्यूह रचना की गई थी। पुराने चावल की खूबी से जुड़ी कहावत को चरितार्थ करते हुए उदय पिण्डारी ने बहुत ही सूझबूझ से इस व्यूह रचना को नाकाम किया। अपनी लगभग पूरी टीम को संचालक निर्वाचित कराने के बाद वे निश्चिंत हो गये थे और इसी के मुताबिक सभापति और उप सभापति के लिए उनकी टीम के खिलाफ पर्चा भरने कोई नही आया।
राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की शीर्ष सहकारी संस्थाओं के लिए आज 11 डेलीगेट भी चुने गये। इनमें उत्तर प्रदेश कापरेटिव बैंक के लिए तीन डेलीगेट उदय पिण्डारी के अभिन्न सहयोगी और पूर्व जिलाध्यक्ष बृजभूषण सिंह मुन्नू, लाल प्रताप सिंह मई और शारदा देवी पत्नी वीरेंद्र खरूसा उत्तर प्रदेश कापरेटिव बैंक के लिए चुने गये। स्वयं उदय पिण्डारी इफको दिल्ली के डायरेक्टर चुने। कृभकों में आलोक दीक्षित पहुंचने में कामयाब रहे। सांसद भानु प्रताप वर्मा के पुत्र मनोज भान पीसीयू लखनऊ में और कृष्णमुरारी शर्मा पीसीएफ में पहुंचे। पुष्पेंद्र सिंह सेंगर कानपुर वित्त विकास लिमिटेड के लिए और आलोक मिश्रा उत्तर प्रदेश दलहन विकास संघ लखनऊ के लिए डेलीगेट निर्वाचित हुए।






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