कानपुर। गिरिजा शंकर त्रिवेदी जी से मेरी मुलाकात 1991 में देहरादून में हुई, उनके आत्मीय भाव से पहली ही मुलाकात में उनका फैन हो गया। यह बात शुक्रवार को शाम मजदूर सभा भवन ग्वालटोली में प्रसिद्ध कवि, पत्रकार स्व गिरिजा शंकर त्रिवेदी जी की जन्मदिन पर अनुकृति रंगमंडल द्वारा आयोजित स्मृति बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी डा. ओमेन्द्र कुमार ने कही।

इस मौके पर मौजूद प्रसिद्ध कवि डा. अंसार कंबरी ने डा. त्रिवेदी से जुड़े अपने संस्मरण सुनाने के बाद अपनी रचना, वो हैं कि वफ़ाओं में ख़ता ढूँढ रहे हैं… हम हैं कि ख़ताओं में वफ़ा ढूँढ रहे हैं …प्रस्तुत की। कवि कमलेश द्विवेदी ने अपनी रचना … ज़िंदगी में वो कितना सफल हो गई, इतनी थ्योरी पढ़ी प्रैक्टिकल हो गई … व सुबोध श्रीवास्तव ने … पत्थरों के इस शहर में आईने सा आदमी, ढूँढने निकला था ख़ुद को चूर होता आदमी … पढ़ी।

बैठक आंरभ होने से पूर्व डा. त्रिवेदी के चित्र पर सभी उपस्थित लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

इस मौके पर रंगकर्मी सुरेश श्रीवास्तव, कृष्णा सक्सेना, उमेश शुक्ला, सिरीश सिन्हा, कमल गौतम, दीपिका सिंह, आरती शुक्ला, अनामिका जायसवाल, अमरदीप, हिमांशु कटारिया, सुमित गुप्ता, स्वयं कुमार, आदर्श भदौरिया मौजूद रहे।

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