उरई। डूडा कालोनी में भ्रष्ट बाबू अरुण कुमार श्रीवास्तव की कारगुजारी के चंगुल से निकालकर न्याय दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट पर आमरण अनशन पर डटे राष्ट्रीय विकलांग पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भगवान दास अहिरवार को आखिर एक हद तक कामयाबी मिली।
ऐसे समय जबकि बाबू ने वरिष्ठ अधिकारियों का भी जमीर खरीद लिया था और पीड़िता पूनम को इंसाफ मिलने की कोई उम्मीद नही बची थी। उस समय भगवान दास अहिरवार ने घने अंधेरे को आखिर कर अपने संघर्ष की रोशनी की एक किरण से भेद ही दिया।
प्रशासन ने पूनम को अस्थाई तौर पर रैन बसेरा के स्थान पर जगह मुहैया करा दी है। साथ ही यह आश्वासन दिया है कि गलत ढंग से आवंटित भू-तल के एक फ्लेट को रदद किया जा रहा है जिसे खाली होने पर उसके नाम आवंटित कर दिया जायेगा।
विदित हो कि पूनम की लड़की रागिनी की किडनी खराब है। जिसकी वजह से उसने भू-तल पर फ्लेट मांगा था। कई महीनों तक वह भू-तल के फ्लेट में रहती भी रही लेकिन बाद में बाबू को पंाच हजार रुपये न देने की वजह से उसका सामान बाहर फेककर उसे ऊपर के तल पर परेशान करने की नियत से फ्लेट आवंटित कर दिया गया।
बहरहाल पूनम को सांत्वना हो सकती है कि अंत भला तो सब भला लेकिन जब तक डूडा में अरुण कुमार श्रीवास्तव जैसे भ्रष्ट बाबू गुल खिलाते रहेगें तब तक शहरी गरीबों का शोषण कभी बंद नही हो पायेगा। क्या गरीबों की भलाई का दम भरने वाली योगी सरकार इस हकीकत को जानने का प्रयास करके उक्त बाबू और उसे संरक्षण देने वाले प्रशासन के खिलाफ कोई कदम उठायेगी।






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