0 नजराना वसूली के लिये कामचोर शिक्षकों को चिन्हित करने का अभियान हुआ पूरा
उरई । बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश शाही द्वारा सेटिंग-गेटिंग के फार्मूले पर चलने से जहां एक ओर जनपद की शिक्षण व्यवस्था चैपट होती नजर आ रही है तो वहीं निलंबन रूपी स्थानांतरण नीति से नजराना की चढ़ौती चढ़ाने वालों की लाइन लंबी होती दिखने लगी। ताज्जुब की बात तो यह है कि पिछले दिनों बीएसए कार्यालय में भी निलंबन रूपी स्थानांतरण नीति का खुलासा हुआ था जिसमें पीड़ित शिक्षक से 80 हजार रुपये की वसूली की गयी थी और फिर उसे वापस भी किया गया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि उनके महकमे में जो कुछ भी चल रहा है उसके पर्दे के पीछे बहुत गहरा रहस्य भी छिपा हुआ है।
बीएसए की धनकमाऊ के मामले में स्पष्ट नीति से जहां खंड शिक्षा अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। मामला चाहे परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति का हो या फिर जनपद में खुले अमान्य विद्यालयों पर नकेल कसने का रहा है। उनकी नीति कभी भी साफ सुथरी नहीं रही। एक ओर जहां शासन करोड़ों रुपये का बजट नौनिहालों का भविष्य संवारने के नाम पर खर्च कर रही है तो वहीं बीएसए व खंड शिक्षा अधिकारी ने इससे दो कदम आगे बढ़कर जनपद में ऐसे विद्यालयों के ऐसे शिक्षकों को गुपचुप तरीक से चिन्हित किया जा रहा है जो शिक्षक या तो बाहर रहकर अपनी दूसरी नौकरियों की तैयारियां कर रहे हैं या फिर जनपद में ही रहकर दूसरे कामों में संलिप्त है। ऐसे शिक्षकों को शिक्षा महकमा अब उपहार देने का प्लान तैयार कर लिया है जिसमें ऐसे शिक्षकों से मोटा नजराना हर माह देने पर उन्हें सभी प्रकार की सुविधायें मुहैया कराकर उनका वेतन हर माह आहरण कराने की होगी। पिछले दिनों बीएसए जब अपने कक्ष में बैठे हुये थे उसी दौरान उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक के जिलाध्यक्ष महेंद्र भाटिया सहित अनेकों शिक्षक पहुंचे तो उनके सामने ही निलंबन रूपी स्थानांतरण के एक मामले में 80 हजार रुपये उनके लिपिक द्वारा वसूलने का खुलासा हुआ था। तो लौना के परिषदीय विद्यालय में तैनात शिक्षका सरिता चैधरी कभी भी विद्यालय में नहीं जाती और न ही विद्यालय के बच्चे उन्हें पहचानते हैं फिर भी उनका वेतन हर माह आहरित होता रहता है। इतना ही नहीं महेबा विकासखंड के लौना में विद्यालय में प्रधानाध्यापक को डकोर विकासखंड में ड्यूटी पर लगा दिया तो सहायक शिक्षक दीपक गुप्ता ने अपने स्थान पर ठेके पर गांव के ही अंकित को रख लिया। तो दीपक गुप्ता अपनी निजी विद्यालय गुरुकुल का संचालन करते हैं। आज शनिवार को जब बीएसए को लौना के ग्रामीणों ने बताया कि गांव का विद्यालय बंद तो बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी ने दीपक गुप्ता को फरमान सुनाया कि अपने ठेके पर रखे अंकित से तत्काल कहो कि वह विद्यालय को खोलकर उसकी फोटो मोबाइल पर भेजे। खंड शिक्षा अधिकारी के कहने पर ऐसा ही हुआ लेकिन दीपक गुप्ता जिला मुख्यालय पर रहे। एक बार एडी बेसिक ने जब लौना विद्यालय का निरीक्षण किया तो दीपक गुप्ता शिक्षक गायब था लेकिन इस मामले पर बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी महेबा की सलाह पर उसका वेतन नहीं काटा बल्कि उससे स्पष्टीकरण मांग कर उसे अभयदान देने का काम किया। ऐसे अनगिनत मामले विकासखंड कदौरा, कुठौंद, रामपुरा, माधौगढ़ के प्रकाश में आ चुके हैं। लेकिन जनपद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी खंड शिक्षाधिकारियों से मिलकर गोलमाल कर नौनिहालों का भविष्य चैपट करने पर तुले हुये हैं जिससे प्रदेश सरकार की छवि आम जनता में धूमिल हो रही है।







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