
विनय गुप्ता
उरई। गरीब और भोलेभाले लोगों को एजेंटों के माध्यम से तरह-तरह के प्रलोभन देकर उनकी मेहनत की कमाई से कुछ ही समय में करोड़पति बने निसार उर्फ सहज एग्रोपरज नाम की चिट फंड कंपनी के कर्ताधर्ता अब अधिकारियों की निगाहों में आ गए हैं। जनसंदेश टाइम्स में छपी खबर के बाद कंपनी सुर्खियों में आ गई है। वहीं खबर को संज्ञान में लेते हुए अपर जिलाधिकारी ने जल्द ही जांच की बात कही है।
जनपद में लोगों की मेहनत का पैसा डकार कर रातोंरात चिट फंड कंपनियों के गायब होने के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। बावजूद इसके अभी भी जिले में चिट फंड कंपनियों का संचालन बदस्तूर जारी है। बताते चलें कि पहले रामनगर और फिर रजिस्ट्री ऑफिस के पास ठिकाना बनाकर लोगों की कमाई को अपने एजेंट के द्वारा अपनी चिट फंड कंपनी में जमा कराने का सिलसिला आज भी जारी है जबकि आज भी सैकड़ों लोग अपनी जमा पूंजी को वापस पाने के लिए प्रतिदिन सहज एग्रोपरपज नाम की इस फर्जी चिट फंड कंपनी के कर्मचारियों के पास जाकर गिड़गिड़ा रहे हैं कि उन्हें उनकी जमा पूंजी दे दी जाए लेकिन कंपनी में बैठे कर्मचारी गरीबों को धक्का मारकर भगा रहे हैं और एक रटारटाया जवाब देते हैं कि अभी रूपए नहीं है इंतजार करो। अब सवाल यह उठता है कि गरीबों को उनकी ही जमा पूंजी के लिए एक नहीं दर्जनों बार कार्यालय के चक्कर काटना पड़ रहा है। कंपनी की माधौगढ़ शाखा में पिछले दिनों लोगों का जमा पैसा वापस न करने पर हुआ विवाद इसका उदाहरण है। एेसे में कंपनी के कर्ताधर्ताओं के मंसूबों पर संदेह होना लाजिमी है। एेसे में अगर उक्त कंपनी के कर्ताधर्ता भी रातोंरात गायब हो जाते हैं तो इसमें पैसा लगाने वालों के पास हाथ मलने के सिवाय कुछ नहीं रह जाएगा। विदित हो कि आज से पहले भी दर्जनों कंपनी गरीबों की करोड़ों की चपत लगाकर भाग चुकी है। वहीं सूत्रों की मानें तो निसार उर्फ सहज एग्रोपरपज भी बोरिया बिस्तर समेटकर भागने की तैयारी कर रही है अगर जल्द ही प्रशासन ने इस कंपनी पर शिकंजा न कसा तो वह दिन दूर नहीं जब शहर में केवल इस कंपनी का बोर्ड ही नजर आएगा।
काला चश्मा काली गाड़ी ये है कंपनी मालिक की पहचान
बता दें कि कुछ समय पहले तक मिडिल क्लास की तरह जीवन यापन करने वाला इस कंपनी का मालिक आज करोड़ों में खेल रहा है। आज जब भी ये उरई आता है तो ब्लैक गाड़ी ब्लैक चश्मा और निजी सुरक्षा गार्डों के साथ आता है और गरीबों की रकम को अटैची में भरकर ले जाता है। एेसे में कंपनी के प्रलोभन में आकर उसमें पैसा जमा करने वाले ग्राहक शायद ही उसे पहचानते हों।




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