
सीओ ने माना, आबकारी टीम का घर में घुसने का तरीका गलत था
कोंच-उरई । पिछले दिनों कस्बे के आराजी लेन इलाके में एक गरीब के घर में घुस कर खाकी द्वारा की गई चालीस हजार रुपये और मोबाइल की लूट मामले में यह तो साफ हो गया है कि लूट की घटना को आबकारी विभाग के सिपाहियों ने अंजाम दिया था। कल जांचकर्ता अधिकारी सीओ संदीप वर्मा ने आबकारी के सिपाहियों को शिनाख्त परेड के लिए जब बुलाया था तो लूट की शिकार महिला ने एक सिपाही की तरफ अंगुली उठा कर पहचान की थी कि उक्त सिपाही ने ही उसके गाल पर थप्पड़ जड़ कर उसे घर से बाहर धकिया दिया था और घर में घुस कर उसकी गृहस्थी तितर बितर कर रुपया और मोबाइल लूट ले गये थे। अब इस मामले में यह देखना बाकी है कि गरीब को न्याय मिल पाता है या लीपापोती कर आरोपियों को क्लीन चिट दी जाती है। सीओ का कहना है कि हालांकि अभी महिला के बयान बाकी हैं और वह स्वयं मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आबकारी टीम ही पीडि़त के घर गई थी लेकिन टीम का घर में घुसने का तरीका गलत था जिसकी रिपोर्ट वह उच्चाधिकारियों को भेजने बाले हैं।
गौरतलब है कि 29 जून को कस्बे के मोहल्ला आराजी लेन में रहने बाले रामहरि के घर में तकरीबन पांच लोग धड़धड़ाते हुए घुसे। उनमें दो लोग खाकी वर्दी में असलहों से लैस थे। जैसा कि पार्वती का कहना है, एक वर्दीधारी ने उस वक्त जब वह घर में अकेली थी, के गालों पर थप्पड़ जड़ कर घर से बाहर निकाल दिया था और घर के कमरे में जाकर वहां रखी गृहस्थी को तहस नहस कर एक गत्ते के डिब्बे में रखे चालीस हजार रुपये तथा मोबाइल लेकर चले गए थे। इस मामले की शिकायत रामहरि ने अपनी पत्नी के साथ 3 जुलाई को डीएम की अध्यक्षता में संपन्न संपूर्ण समाधान दिवस में की थी जिसकी जांच सीओ संदीप वर्मा को दी गई है। सीओ की जांच के इतर शिकायत कर्ता को कोतवाली बुला कर सिपाहियों को दिखाया गया था लेकिन महिला ने उनमें से किसी के होने से इंकार किया था। कल शुक्रवार को सीओ ने आबकारी विभाग के सिपाहियों को बुलवा कर जब महिला के सामने किया तो महिला ने झट से एक सिपाही को पहचान लिया जिसने उसे थप्पड़ मारे थे। इससे यह तो साफ हो गया कि लूट आबकारी के सिपाहियों ने की थी। इस सबके बाबजूद गरीब को न्याय मिल सकेगा, इसमें संदेह है। सीओ संदीप वर्मा का कहना है कि आबकारी टीम एक शिकायत की जांच करने रामहरि के घर गई थी लेकिन टीम का तरीका गलत था, उसे स्थानीय पुलिस की मदद लेनी चाहिये थी। इसके अलावा महिला के साथ मारपीट को भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन जहां तक रुपयों की लूट की बात है उसे साबित कैसे किया जा सकता है।






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