उरई। सरकार के कड़े तेवरों से लेखपालों में कोई खौफ नजर नही आ रहा। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष और मंत्री के खिलाफ एस्मा के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर से लेखपालों के मनोबल में रंचमात्र की गिरावट नही आई है। आज भी उन्होंने जिला मुख्यालय पर अपनी हड़ताल में बुंलदी दिखाई। उधर लेखपालों के द्वारा काम बंद रखने से जरूरतमंद लोगों के सामने परेशानी का पहाड़ खड़ा हो गया है। उन्हें राहत और तसल्ली देने के नाम पर सरकार केवल जबानी जमां खर्च कर पा रही है।
लेखपालों को हड़ताल से विरत करने के लिए मुख्यमंत्री खुद काम पर वापस न लौटने पर उनकी सेवाएं समाप्त करने का एलान कर चुके हैं। लेकिन लेखपाल बिल्कुल भी इसकी परवाह नही कर रहे। उधर मुख्यमंत्री को भी अपनी घोषणा को अमली रूप देने में सौ बार सोचना पड़ रहा है। कार्रवाई के नाम पर जालौन जिले में लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष और मंत्री के खिलाफ एस्मा के तहत रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। लेखपाल संघ की तहसील इकाइयों के अध्यक्ष और मंत्री निलंबित कर दिये गये हैं। नव नियुक्त 108 लेखपालों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया जा चुका है। फिर भी जिले के 293 लेखपालों में से 288 हड़ताल पर हैं। मात्र एक लेखपाल पूरा कार्य कर रहा है। तीन लेखपाल आंशिक रूप से कार्यरत हैं जबकि एक लेखपाल मेडिकल अवकाश पर है।
लेखपालों की हड़ताल की वजह से तहसीलों में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के आवेदनों का अंबार लग गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इन प्रमाण पत्रों के लगभग 30 हजार आवेदन लेखपालों की रिपोर्ट न लग पाने की वजह से आगे नही बढ़ पा रहे हैं। जिससे व्यवस्था चरमरा गई है।

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