<

div>तानाशाह डीएसओ के रवैए से परेशान कोटेदार
उरई। सरकार की मंशा को उनके अधिकारी ही पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। गरीबों को दो वक्त की रोटी उपलब्ध कराने के लिए कम दर पर सरकारी गेहूं, चावल व मिट्टी के तेल की व्यवस्था का लाभ डीएसओ की खाऊ-कमाऊ नीति की भेंट चढ़ती जा रही है। उनके इस रवैए से जहां पात्र बढ़े दामों पर सामग्री खरीदने को विवश होते हैं वहींं कोटेदारों में भी डीएसओ के प्रति रोष व्याप्त होने लगा है। इसके बावजूद अपनी आदतों से बाज नहीं आने का नाम नहीं ले रहे।
मालूम हो सरकारी खाद्यान्न की दुकानों में कम कीमत पर खाद्यान्न दिया जाता है। गरीब के पेट के लिए दिए जाने वाले इस निवाले से ही जिला पूर्ति अधिकारी अपना पेट भरना चाह रहे हैं क्योंकि गरीब को मिलने वाले निवाले से कमीशन लेकर उसको कोटेदार से बढ़े दामों पर बिकवा रहे हैं। इसके साथ ही कोटेदारों को ग्राहकों से खरीखोटी सुनने पड़ती है। इससे कोटेदारों में भी डीएसओ के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। सूत्रों की मानें तो यह नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि हो सकता है कोटेदार जल्द ही हड़ताल पर भी जा सकते हैं। यही नहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जिले में कमर टूट गई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने थंब इंप्रेशन मशीन से वितरण शुरू कराया था जिसमें शत-प्रतिशत वितरण अंगूठे को मशीन में लगाने से किया जाना था लेकिन एेसा संभव नहीं हो सका।

Leave a comment