उरई। रेलवे की नौकरी की व्यस्तता के बीच भी वे समाज के लिए एक बड़ी पहल कर रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें हरियाली के अग्रदूत की अलग पहचान समूचे बुंदलेखंड में मिल चुकी है। हम यहां बात कर रहे हैं रेलवे के मुख्य टिकिट निरीक्षक रवि शाक्या की। पौधे रोपने और उनकी रखवाली के लिए लोगों को प्रेरित करने का जैसे उन्हें जुनून सवार रहता है। वे अभी तक 1 लाख से अधिक पेड़ लगा चुके हैं। लोग कहते हैं कि वृक्षारोपण के लिए उन जैसे और मिशनरी लोग आगे आ जायें तो जिस पर्यावरण संकट की चर्चा आज बहुत चिंता के साथ होती है उसका समाधान होते देर नही लगेगी।
बचपन से ही थी लगन
बचपन में बच्चों के मन में तमाम के तरह के खेलों का शौक होता है। लेकिन होश संभालने के पहले ही 9 वर्ष की उम्र में रवि शाक्या को पौधे लगवाने की लगन लग गई। उनके पिताजी उस समय ललितपुर में नायब तहसीलदार थे। उनके दो और साथी थे। पीयूष रंजन यादव जो इस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं। उनके पिता भी उस समय ललितपुर में एसडीएम थे। इसके अलावा ग्वालियर के राजीव श्रीवास्तव जिनके पिता वहां तहसीलदार थे। यह तिकड़ी ललितपुर में बरसात में खाली जगहों पर पौधे लगाते घूमती। उनके बचपन का यह शौक फिर जिंदगी भर के लिए जुनून बन गया।
खुद खरीदकर लाते हैं पौधे
उरई में उनकी पोस्ंिटग 2005 में हुई। इसी दौरान उन्होंने संस्कार ग्रामोत्थान संस्था के नाम से एक एनजीओ बनाया। यह एनजीओ कई सामाजिक कार्य कराता है लेकिन मुख्य रूप से पौध रोपण में लोगों को सहभागी बनाना इसका उददेश्य है। खास बात यह है कि उनके एनजीओ ने आज तक एक रुपये का भी सरकारी अनुदान नही लिया है।
पौध रोपण या तो वे किसी के घर के सामने कराते हैं या बगीचे में तांकि अंजाम तक पहुंचने तक उसकी परवरिश हो सके। उन्होंने उरई की पूरे रेलवे कालोनी में इंच-इंच पर पौधे लगवा दिये हैं। जिनमें कई तो वृक्ष बन चुके हैं। जो लोग अपने यहां पौधे लगाने के लिए उन्हें आमंत्रित करते हैं उनके यहां वे खुद पौधे खरीदकर पहुंचते हैं। इसके बाद ट्री गार्ड की व्यवस्था भी अपने पास सके कराते हैं। रेलवे कालोनी में तो उन्होंने पौधों की नियमित सिचाई के लिए अपने खर्च पर कर्मचारी की व्यवस्था कर रखी है।
मांगलिक कार्यक्रमों में पौध रोपण को भी बना दिया अनिवार्य रश्म
वे प्रतिवर्ष एक गरीब जोड़े का विवाह अपने खर्च पर कराते हैं। जिसमें आने वाले सभी जनातियों और बरातियों को उनकी ओर से लगाने के लिए पौधे दिये जाते हैं। इस वर्ष रघुवीर धाम उत्सव गृह में उन्होंने जो शादी कराई उसमें कई लोग 10-10 तक पौधे मांग कर ले गये। पौध रोपण के लिए लोगों में उनके प्रयास से उत्साह का ज्वार उमड़ता दिखने लगा है। अपने मित्रों की वर्षगांठ, वैवाहिक वर्षगांठ या उनके यहां होने वाले किसी भी मांगलिक कार्यक्रम में वे पौधों की सौगात देना नही भूलते। अब तो यह हालत हो गई है कि उनके सर्किल में किसी के यहां आयोजन हो पौध रोपण साथ में होना अनिवार्य परंपरा बन गया है।






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