उरई। एक ओर जगम्मनपुर के पास पचनद को पर्यटक स्थल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर यहां तक के पहुंच मार्गों का कोई पुरसा हाल नही है। जो कि सरकार की नीतियों में उलटबासी को उजागर करता है।
कुठौंद-जगम्मनपुर मार्ग बाया रदावली, चंदावली, लिड़ऊपुर, लिटावली, बहराई, धूता, पतराही तो बेहद खस्ता है। लिड़ऊपुर नाले से जगम्मनपुर तक गढडे ही गढडे हैं। जहां से वाहन लाना ले जाना खतरे से खाली नही है।
जगम्मनपुर के अंदर श्रवण कुमार इंटर कालेज के सामने भी पुलिया टूटी है। राजकीय इंटर कालेज तक तो रोड ही नही है। रामपुरा से दिल्ली जाने वाली बसें जब यहां से गुजरती हैं तो हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात के समय तो बसों का संचालन बंद तक करना पड़ता है।
शुरू से ही मांग हो रही है कि स्थिति में सुधार के लिए जगम्मनपुर में बाइपास बनाया जाये। लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नही दी जा सकी है। अब जब कि पचनदा को पर्यटक स्थल बनाने पर इतना खर्च किया जा रहा है तो इसका औचित्य और बढ़ गया है। क्षेत्रीय जनता जन प्रतिनिधियों से मांग कर रही है कि वे इस बाबत सरकार को बतायें और पचनदा को पर्यटकीय तौर पर संवारने के भारी-भरकम खर्च की सार्थकता के लिए प्राथमिकता के आधार पर जगम्मनपुर में बाइपास निर्माण को मंजूरी दें।

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