उरई। भूमिगत जल स्तर को बनाये रखने के लिए बुंदेलखंड की प्राचीन तालाब संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए 89 तालाब हाल में मनरेगा के तहत खुदवाये गये हैं। जबकि 139 तालाबों के गहरीकरण का काम चल रहा है।
हैंडपंप और नलकूंपों के युग में तालाब जैसे आप्रासंगिक हो गये थे। जिसके कारण जिले में हजारों की संख्या में मौजूद तालाबों का अस्तित्व कब्जे के कारण समाप्त प्राय हो गया। जब तालाब न रहने से भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे गिरने लगा तो तालाब की उपयोगिता लोगों को फिर समझ में आई। इस बीच उच्चतम न्यायालय ने भी सभी तालाबों पर कब्जे खत्म कराकर उनकी खुदाई और संरक्षण का फरमान जारी कर दिया। यह दूसरी बात है कि प्रशासन ने इस नाम पर केवल खानापूरी की कवायद की।
लेकिन 2008 में जब प्रदेश में मायावती की सरकार थी तो बुंदेलखंड में तालाबों के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण का व्यापक अभियान मनरेगा से चलाया गया। जिससे तालाब काफी हद तक सुरक्षित हो गये। जिला मुख्यालय के नजदीक राहिया के विशाल तालाब जैसे कई तालाब इस अभियान के चलते फिर लबालब दिखाई देने लगे। लेकिन प्रदेश में सरकार बदलते ही शासन की प्राथमिकता बदल गई। जिससे फिर इन तालाबों की उपेक्षा होने लगी। हालांकि मायावती की सरकार में सुंदरीकरण के तहत शामिल किये गये तालाबों की चाहरदीवारी बना दी गई थी। जिससे अतिक्रमण से तो ये सुरक्षित हो गये लेकिन सिल्ट सफाई न होने की वजह से इनकी दुर्दशा हो गई।
नई सरकार ने फिर मनरेगा में जिले के तालाबों के पुनरुद्धार को प्राथमिकता में शामिल किया है। मुख्य विकास अधिकारी अवधेश बहादुर सिंह ने बताया कि डकोर ब्लाक में 12, जालौन ब्लाक में 7, कदौरा ब्लाक में 11, कोंच ब्लाक में 5, कुठौंद ब्लाक में 13, माधौगढ़ ब्लाक में 4, महेबा ब्लाक में 9, नदीगांव ब्लाक में 11 और रामपुरा ब्लाक में 17 तालाबों का गहरीकरण हो चुका है। जबकि डकोर ब्लाक में 4, जालौन में 4,, कोंच में 6, कुठौंद में 5, माधौगढ़ में 3, महेबा में 1 और नदीगांव में 31 तालाबों पर कार्य कराया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि तालाबों से जहां मवेशियों के लिए पानी पीने की सुविधा हो जायेगी वहीं नहाने कपड़े धोने आदि में हैंडपंप के पानी का दुरुपयोग भी बंद हो जायेगा।
ग्रामीण हालांकि तालाबों पर सरकार और प्रशासन की नजरे एक बार फिर इनायत होने से प्रसन्न हैं। लेकिन उनका कहना है कि तालाब भरे कैसे जायें। इस चुनौती का तोड़ अभी भी प्रशासन नही ढ़ूढ़ पाया है। नहरों की गूलों पर कब्जे हो चुके हैं जिनसे अतिरिक्त पानी तालाब में डाला जाता था। बारिश इतनी हो नही रही कि तालाब बारिश के पानी से भर जायें। ऐसे में तालाब शोपीस बनकर रह गये हैं। यह दूसरी बात है कि इस वास्तविकता के बावजूद मुख्य विकास अधिकारी अवधेश बहादुर सिंह का सीना ठोककर कहना है कि वे सभी तलाब भरवा देगें।

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