कालपी-उरई । इस वर्ष भी अपेक्षा के अनुरूप मानसूनी बरसात न होने के कारण किसानों के चेहरों मे मायूसी छाने लगी है। बारिश न होने के तमाम लोग बिगड़े पर्यावरण संतुलन तथा सौर ऊर्जा प्लांटों से निकलने वाली किरणों को लेकर अटकलें लगाई जा रही है।
उल्लेखनीय हो कि कालपी तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत तीन अलग-अलग ग्रामों शाहजहांपुर उकास आदि स्थानों मे बडी-बडी क्षमता के निजी सौर ऊर्जा प्लांट लग गये है। जो सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादित करके पावर कार्पोरेशन को सप्लाई करते है। इसके अलावा कालपी नगर पालिका भवन आदि स्थानों सौर ऊर्जा के प्लांट लग गये है। जो नगरीय स्ट्रीट लाइन मे बिजली जगमगाते है। सौर ऊर्जा प्लाटो से भले ही विद्युत का उत्पादन बढ गया है। लेकिन जानकारो के मुताबिक इसके दुष्परिणाम भी हो सकते है। जैसे बारिश की कभी होना है। क्षेत्रीय किसानों का मानना है कि कालपी क्षेत्र मे आये दिन काले बादल तो छा जाते है। लेकिन झमाझम बारिश नहीं हो पाती है।अशंका प्रकट करते हुये लोग बतलाते है कि कोई न कोई वजह है जिससे बरसात नहीं हो पा रही है। इसके लिये सौर ऊर्जा प्लांटों पर भी अंगुली उढ रही है। प्लांटों मे स्थापित लाखों सौर ऊर्जा प्लांटों से किरणें निकलती है जो मानसूनी वातावरण को प्रभावित कर रही है। इसके लिये परिक्षण करने की जरूरत हो गई है।इसी प्रकार यमुना एवं बेतवा नदियों की जलधारा के बीच से हुये वालू खनन से प्रकृति का वातावरण भी तब्दील कर रहा है। इधर बरसात न होने से किसानों के माथे मे फसल को लेकर चिंता की लकीरें उत्पन्न होने लगी है। कुछ भी हो मानसूनी बरसात न होने की दशा मे केन्द्र सरकार एवं प्रदेश सरकार को भी क्षेत्र के पर्यावरण की जरूरत महसूस होने लगी है।






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