उरई। मध्य प्रदेश के धान कटोरा से आये महिलाओं के दल ने कदौरा क्षेत्र में पानी से भरे खेतों में घुसकर बासमती की वैज्ञानिक ढंग से रोपाई के गुर बताये।
कदौरा जिले का सबसे शुष्क क्षेत्र है। एक दशक पहले पानी की भारी कमी की वजह से यहां नलकूंप की खुदाई प्रतिबंधित थी। गेंहूं तक की पैदावार लोग नही कर पाते थे। कम पानी वाली जिंसों की खेती होती थी जिससे किसानों का गुजारा तक चलना मुश्किल था। लेकिन अब कदौरा के दिन बहुर गये हैं।
ऐसा नही कि यहां बहुत ज्यादा बारिश होने लगी हो। हालांकि यह बात दूसरी है कि अभी जिले में सबसे ज्यादा पानी कदौरा ब्लाक में ही बरसा है। लेकिन पिछले पांच-छह साल से प्रतिबंध हट जाने के बाद जब लोगों ने काफी निजी नलकूंप खुदवा लिए तो धान की खेती उन्हें बहुत रास आई। इसमें उन्हें पर्याप्त मुनाफा भी मिला। इसके बाद यहां खेती का रुझान बदल गया।
अब सरकार भी यहां के लोगों को व्यवस्थित तरीके से धान की खेती के गुर सिखाने में मदद देने के लिए आगे आई है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले को धान कटोर कहा जाता है जहां से धान की रोपाई में पारंगत 32 महिलाओं को कृषि आंतरिक रिसोर्स पर्सन के रूप में यहां बुलाया गया। गुरुवार को ग्राम बबीना में 16-16 महिलाओं की दो टोलियों ने यहां धान की रोपाई करने वाली महिलाओं को श्री विधि द्वारा रोपाई और जैविक खेती के गुर बताये। स्थानीय महिलाओं ने इसमें काफी दिलचस्पी ली। कार्यक्रम का संयोजन ब्लाक मिशन मैनेजर पुष्पेंद्र ने किया। झाबुआ से आये महिलाओं के दल में रेखा लोधी, जूली लोधी, राजकुमारी, नीरज सिंह आदि मुख्य थीं और टीम लीडर के रूप में माया जाटव इस दल का नेतृत्व कर रहीं थीं।

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