उरई। लगभग एक सप्ताह पहले आकांक्षा समिति द्वारा रामकुंड तालाब परिसर में किये गये वृक्षारोपण की सार्थकता पर प्रश्न चिंह नजर आ रहा है।
जुलाई के महीने में सरकारी स्तर पर वन महोत्सव मनाये जाने की परंपरा है। जिसमें गणमान्य वृक्षारोपण की औपचारिकता कर फोटो खिचवाने के लिए टूट पड़ते हैं। लेकिन इनमें से कितने प्रयास गंभीर होते हैं यह बात अलग है। अगर सभी लोग वृक्षा रोपण में गंभीरता दिखाएं तो पर्यावरण की सूरत कुछ ही वर्षों में बदल सकती है।
गत दिनों रामकुंड तालाब परिसर में आकांक्षा समिति द्वारा जोरशोर से किया गया वृक्षारोपण भी एक विशिष्ट उपक्रम था। लेकिन नगर पालिका प्रशासन की ओर से न तो लगाये गये पेड़ों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड आदि का इंतजाम किया गया और न ही सिचाई का। नतीजा यह है कि अभी से ये पौधे जानवरों के निवाले बनने के साथ-साथ सूखने लगे हैं। जिससे ऐसे खोखले वृक्षारोपण को लोग लानत भेज रहे हैं।

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