
कालपी। लोकप्रिय कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज की 93 वर्ष की आयु में दिल्ली के एम्स के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार की रात्रि दस बजे हुये निधन की जानकारी कालपी महोत्सव कराने वालों को लगी तो वह अपने दुख को नहीं रोक पाये तथा कालपी के प्रति उनके लगाव के तमाम संस्मरण सुनाई देने लगे।
बुन्देलखण्ड की पावन धरा जहां वर्ष 2001 में तीन दिवसीय एेतिहासिक कालपी महोत्सव सम्पन्न हुआ था। वर्ष 2001कालपी महोत्सव के संयोजक रहे तत्कालीन उपजिलाधिकारी शत्रुघन सिंह व पूर्व विधायक डा. अरुण मेहरोत्रा ने जनसंदेश टाइम्स समाचार पत्र से एक मुलाकात में डा. मेहरोत्रा ने बताया कि मैं एक चिकित्सक के रूप में कार्य करता था। नगर की जनता व अपने सहयोगियों के सहयोग से तीन दिवसीय कालपी महोत्सव ने समूचे बुन्देलखण्ड सहित पूरे प्रदेश में अलग पहचान बनाई थी।मै जब कालपी महोत्सव के लिए पदम् श्री, पद्म भूषण,यश भारती से सम्मानित लोकप्रिय कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज जी के पास कालपी महोत्सव के लिए कार्यक्रम लेने पहुंचा तो उन्होंने कालपी का नाम सुनते ही अपने कार्यक्रम की स्वीकृत दे दी तथा 8 मार्च 2001को कालपी के ठक्कर बापा इण्टर कालेज सभागार में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में गोपाल दास नीरज जी के अलावा पद्म श्री बशीर बद्र ने शिरकत कर कार्यक्रम को अखिल भारतीय पहचान दी। उस दौरान इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में उतर प्रदेश सरकार के मौजूदा उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा उस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे जो कि पूर्व विधायक डा. अरुण मेहरोत्रा के लखनऊ के छात्र जीवन के मित्र थे। पूर्व विधायक डा. अरुण मेहरोत्रा ने बताया कि जब मैंने नीरज जी को बताया कि मैं किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ में पढ़ा हूं तो वह भावुक होकर अपने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र जीवन के किस्से सुनाने लगे। उनकी लखनऊ की शायरी का वह दौर । मैंने जब बताया कि कालपी के लोग शायरी के शौकीन है व उर्दू जुबान अच्छे से समझते है। तो उनका दर्द छलका कि हम उर्दू पर अपना हक छोडऩे वाले नहीं है। लेकिन कितना अजीब है कि सियासतदानों ने जुबान का ताल्लुक मजहब से जोड़ दिया। उन्होंने बताया कि नीरज जी का कालपी के एेतिहासिक स्थलों से इतना लगाव था कि वह अपने कालपी कार्यक्रम के दौरान झांसी की रानी का किला, चौरासी गुम्बद, वेदव्यास मन्दिर, हिन्दी भवन कालपी,पाहुलाल मन्दिर,सूर्य मन्दिर क्षेत्र विशेष लंका मीनार जैसे प्राचीन स्थलों पर पहुंचकर अवलोकन किया था जिसकी यादें आज भी यहां के लोग करते हैं। हिन्दी गीतों के इस पुरोधा ने हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा ले ली।आज कालपी महोत्सव की समिति व हिन्दी हिन्दी विधार्थी सम्प्रदाय के डा. अरुण मेहरोत्रा, ममता विधार्थी, सर्वेश विधार्थी, राजीव पुरवार,सन्दीप गुप्ता, शिव कुमार कनौडिया, अरविन्द शर्मा, अमित पुरवार, डा. एम. सिंह, ओपी श्रीवास्तव, आशुतोष मिश्रा आदि ने उनके महान कवि गीतकार गोपाल दास नीरज के निधन पर गहरी शोक सम्वेदना व्यक्त की।






Leave a comment