
उरई। शासन की नोडल अधिकारी और महानिबंधक मिनिस्थी एस. ने जनपद के दौरे के दूसरे दिन रविवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया । इस दौरान उन्होने कहा कि अस्पताल में महिलाओं और बच्चों की देखभाल के कामों के लिए महिलाओं के स्वयम सहायता समूहों की सेवायें ली जानी चाहिये ।
इसके पहले अस्पताल के वार्डों के निरीक्षण में कई पंखे बंद मिलने और ट्यूब लाइट की धुंधली रोशनी देख कर उन्होने वरिष्ठ चिकित्साधीक्षक डॉ ए के निगम को फटकार लगाई । बाद में उन्होने बताया कि अस्पताल प्रशासन से उन्होने कहा है कि प्रसूताओं का आहार तैयार करने का जिम्मा स्वयं सहायता समूहों को सौंपे । वे महिलाओं के हिसाब का रुचिकर और गुणवत्तापूर्ण भोजन अधिक बेहतर तरीके से तैयार कर सकेंगी । इसी तरह लाउंड्री का भी जिम्मा स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जा सकता है ।
उन्होने कुपोषित बच्चों के पुनर्वास केंद्र को ले कर पत्रकारों को बताया कि बाल विकास परियोजनाधिकारियों से कहा गया है कि वे रोस्टर तैयार करें ताकि 40 . 40 कुपोषण के शिकार बच्चे स्थायी रूप से 14-14 दिन उपचार के लिए इसमें बने रह सकें । पुनर्वास केंद्र में बच्चों को दी जाने वाली खुराक आदि की जानकारी उनके अभिभावकों को भी दी जाये । बच्चों के खाने की जाँच खादय सुरक्षा अधिकारी नियुक्त कर नियमित रूप से कराई जाये और उनका आहार तैयार करने वालों को उपयुक्त प्रशिक्षण दिया जाये ।
मिनिस्थी एस ने कहा कि 8 साल से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का पैथोलोजिस्ट न होने के कारण नवीनीकरण नहीं हो पाया है । वे शासन में तत्काल यहाँ पैथोलोजिस्ट नियुक्त कराने के लिए प्रभावी पैरवी करेंगी ।
डाक्टरों की कमी को ले कर उन्होने कहा कि यह स्थिति तो पूरे प्रदेश में है । लेकिन संविदा पर डाक्टर नियुक्त करवा कर इस कमी को दूर किया जायेगा । अपर जिलाधिकारी पी के सिंह , मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अल्पना बरतारिया भी निरीक्षण में साथ थे ।






Leave a comment