उरई। सरकारी बैंकों में अब बढ़ते एनपीए को घटाने की कवायद जोरों से चल रही है। सरकार के डंडे की वजह से बैंक प्रबंधन को इस मामले में लापरवाही छोड़कर कार्रवाई के लिए तत्पर होना पड़ा है। जिले में भी बैंकों के एनपीए को घटानें में हाल में बड़ी कामयाबी हासिल की गई है।
पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने कर्ज तो उदारता से बाटा लेकिन उनकी वसूली में कोई दिलचस्पी नही ली। जबावदेही न होने से बकायदारों के खातों को गैर निष्पादित की सूची में डालकर बैंक प्रबंधन अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता था। इसलिए बैंकों की वित्तीय हालत लगातार खस्ताहाल होती जा रही थी। यह देखकर सरकार का रुख सख्त हो गया। बैंक प्रबंधकों को गैर निष्पादित खातों की बकायेदारी जमा न होने पर उनके वेतन की निकासी पर रोक लगा देने के लिए आगाह किया जाने लगा। इस कड़ाई के बेहतर परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
पिछली लोक अदालत में सार्वजनिक क्षेत्र की जिले की 1147 बैंक शाखाओं के प्रबंधकों ने बकायेदारों से ऋण जमा कराने के लिए सौदेबाजी की जमकर मशक्कत की। जिससे अधिकांश एनपीए खाते पुनर्जीवित कर लिये गये।
अग्रणी जिला बैंक मुख्य प्रबंधक ने बताया कि गैर निष्पादित खातों में जिले में बैंकों का 10 अरब 49 करोड़ 70 लाख रुपया जाम था। जिसमें बकायेदारों ने 5 अरब 7 करोड़ 30 लाख रुपये जमा कराने पर समझौता करने की सहमति दे दी। नतीजा यह हुआ कि इसमें 2 अरब 67 करोड़ रुपये के ऋण की बैंक में वापसी भी हो गई। बकाया 2 अरब 40 करोड़ 30 लाख रुपये को भी जल्दी जमा कराने का आश्वासन बकायदारों ने दिया है। यह बात अग्रणी बैंक मुख्य प्रबंधक ने बताई।
इस बीच किसानों को बैंक ऋण का अधिक लाभ देने के लिए इस बार न्याय पंचायत स्तर तक केसीसी बनाने के लिए कैंप लगाये गये। जिले के लगभग ढाई लाख किसानो में 1 लाख 10 हजार किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किये जा चुके हैं। कैंपों में 7 हजार 775 और आवेदन जिले के 942 ग्रामों में से केसीसी बनाने के लिए आये थे। जिनमें से 6 हजार 99 को मंजूरी दी जा चुकी है। 7 हजार 703 किसानों को रुपे कार्ड भी जारी किये गये हैं। तांकि बैंक जाने में असमर्थ बुजुर्ग किसान घर बैठे बीसी के माध्यम से बैंक का लेन-देन कर सकें।

Leave a comment