उरई। मंगलवार रात से आज सुबह तक जारी रही 20 घंटे की लगातार बारिश से जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने निचले इलाकों में भारी जल भराव की खबरों के बाद पूरे जनपद में राहत और बचाव कार्य के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। जुलाई के महीने में पूरे जनपद में 250 सौ मिली मीटर औसत वर्षा होनी चाहिए। लेकिन कल तक 150 सौ मिली मीटर से भी कम बारिश हुई थी। जिससे विकराल सूखे के हालात बने हुए थे। पर अब एक ही दिन में 109 मिली मीटर पानी गिर जाने से जल प्लावन का संकट गहरा उठा है।
शहर में गुरुवार को रात भर हुई बारिश के कारण सुबह सभी जगह सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी भरा हुआ था। यहां तक कि कलेक्ट्रेट के सामने की मुख्य सड़क पर भी जैसे नदी बह रही थी। जिससे आवागमन ठप्प पड़ गया था। नगर पालिका की जल निकासी के इंतजाम की बारिश ने पोल खोल कर रख दी थी। दुकानों के न खुल पाने से दिन भर बाजार में सन्नाटा रहा। बच्चे भी स्कूल नही जा पाये। जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने कहा कि शहर के नालों की सफाई के लिए समय से टेंडर करा दिये गये थे। इस बीच अधिशाषी अधिकारी का स्थानांतरण हो जाने से व्यवस्था गड़बड़ा गई। फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था करके सफाई कराई जानी चाहिए थी। अगर कहीं अतिक्रमण था तो पालिका प्रशासन को उन्हें अवगत कराना चाहिए था। उसे फोर्स उपलब्ध कराया जाता। इसलिए लापरवाही तो हुई है जिसकी जांच कराई जायेगी।
खेती पर बारिश का मिला-जुला असर हुआ है। तिल की फसल को खेतों के भर जाने से भारी नुकसान होगा। लेकिन बाजरा और ज्वार की बुबाई में तेजी भी आयेगी। बाढ़ की दृष्टि से 158 संवेदनशील ग्रामों में तत्काल आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिये गये हैं। 27 बाढ़ चैकियां स्थापित की गई हैं। जहां जरूरत का सभी सामान मुहैया है। 95 नावें तैयार रखी गई हैं जो पानी में घिरी आबादी को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने में सहायता देगीं। शहर में भी बाढ़ पीड़ितों को अस्थाई शरण के लिए स्थान चिन्हित कर शिविर बना दिये गये हैं।
उधर बारिश के कारण जिले में बहने वाली नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। कालपी में राजघाट पर यमुना का खतरे का निशान 108 मीटर पर है। जहां नदी अभी 99.59 मीटर पर पहुंच चुकी है। इसी तरह बेतवा का खतरे का निशान मुहाना घाट पर 122.65 मीटर पर है जो 111.80 मीटर पर पहुंच चुकी है। जिलाधिकारी ने कहा कि नदियों के जल स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है तांकि उनका पानी खतरे के निशान पर पहुंचने के पहले ही डूबने की आशंका वाले गांवों को खाली कराया जा सके।






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