
- ग्राम परासनी में बारिश के कारण गिरी इमारत के मलबे में दबी गृहस्थी, कोई जनहानि नहीं
कोंच – बीती रात्रि नदीगांव थाने के ग्राम परासनी में एक दो मंजिला इमारत इस तरह ढह गई जैसे ताश के पत्तों से बना मकान। गनीमत यह रही कि मकान गिरने का आभास पाकर घर के सभी सदस्य दौड़ कर बाहर निकल गये थे अन्यथा बड़ी जनहानि भी हो सकती थी, अलबत्ता मकान मालिक की पूरी गृहस्थी इमारत के मलबे में दब कर तहस नहस हो गई। अनुमान के मुताबिक तकरीबन चार लाख रुपये का नुकसान बताया जा रहा है। प्रशासन में बैठे अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया है।
बुधवार से प्रारंभ हुई बारिश हालांकि गुरुवार की दोपहर थम गई थी लेकिन इस बारिश ने पुरानी इमारतों और कच्चे घरों पर अपना कहर जरूर बरपाया है। बीती रात्रि लगभग दस बजे नदीगांव थाना क्षेत्र के ग्राम परासनी निवासी दशरथ यादव का परिवार जब सोने के प्रयास में था तभी तेज हवाओं की बजह से उसे अपना दोमंजिला मकान हिलता महसूस हुआ। उसे शायद आभास हो गया था कि मकान गिर सकता है लिहाजा उसने अपने पूरे परिवार के साथ घर के बाहर की ओर दौड़ लगा दी। जैसे ही ये लोग बाहर निकले, दो मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई। मकान के गिरने में हालांकि जनहानि बच गई लेकिन गृहस्वामी की गृहस्थी का पूरा सामान जिसमें टीवी, बेड, अलमारी, कुर्सियां, चापाई और गल्ला पानी दब कर बर्बाद हो गया। इस हादसे में चार लाख के नुकसान का अनुमान है। नायब तहसीलदार राकेश राजपूत ने लेखपाल गुलाबसिंह के साथ मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है और जो भी इमदाद अनुमन्य होगी, पीडि़त को दिलाई जायेगी। गौरतलब है कि गृहस्वामी दशरथ के बेटे बहू कुछ समय पहले मृतक हो गये थे। अब वह अपने पौत्र तथा पौत्र बहू के साथ रहता है। आशियाना उजड़ जाने के बाद यह परिवार पड़ोसी के यहां शरण लेने को मजबूर है।
फिर शुरू हुई बारिश ने डराया कच्चे घरों में बसर करने बालों को
लगभग बीस घंटे तक थमी रही बारिश एक बार फिर रौ में आती दिखाई दे रही है। शुक्रवार की सुबह सुहाना मौसम लेकर आई थी लेकिन ग्यारह बजते बजते बूंदाबांदी शुरू हो गई और आसमान बादलों से भर गया। इस बूंदाबांदी ने नदी नालों के आसपास बसे तथा कच्चे घरों और झोपडिय़ों में बसर करने बालों को बुरी तरह से डरा दिया है।
गौरतलब है कि बुधवार को शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि सब कुछ पानी पानी हो गया। इतनी भीषण और विकराल बारिश ने शुरू होने के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा, नाले नालियां हों या रिहायशी और सरकारी भवनों के इलाके, सब कुछ तरबतर था। सड़कों और गलियों में घुटनों तक पानी भरा था, कई निचले इलाकों को बारिश का पानी अपने आगोश में समेट चुका था। कई इलाके जल भराव के कारण टापू बन गये थे। जब अपनी भड़ास निकालने के चौबीस घंटे बाद बारिश थमी तब लोगों की अटकी सांसें बापिस लौट सकी थीं। शुक्रवार को एक बार फिर से बारिश अपनी रौ में आती दिखाई दे रही है। अगर इसने कहीं बुधवार जैसी रफ्तार पकड़ी तो गरीबों का नुकसान होने से कोई नहीं बचा सकता है। प्रशासन ने हालांकि बाढ से निपटने की तैयारी पहले से ही कर रखी है लेकिन वह नागरिकों की कितनी मदद कर पायेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।






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