उरई। सरकार की नीतियों के बरक्स खुशहाली की ऐसी तस्वीर उभारी जाती है जिसमें बेरोजगारी जैसी समस्या पूरी तरह फना नजर आने लगती है। ऐसा ही हुआ है प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लाभ देने के लिए जिले में तय किये गये कोटे में।
एक ओर हाल के वर्षों में बेरोजगारी सुरसा के मुंह की तरह विकराल होती चली जा रही है। दूसरी ओर बेरोजगारों को काम देने का ढिढोरा पीटने वाली सरकार अपने हाथ तंग करती जा रही है। यह विरोधाभास बेरोजगारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा दिखाई दे रहा है।
इसका खुलासा कालपी में सर्वे के लिए पहुंचे जिला ग्रामोद्योग अधिकारी शिवदान सिंह भदौरिया ने किया। उन्होंने बताया कि उनके विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का लाभ देने का लक्ष्य केवल चार कर दिया गया है। जबकि बीते वर्ष की ही आधा दर्जन पत्रावलियां पहले से बैंकों में बिलंबित पड़ी हैं। ऐसे में वे नये लोगों को अवसर दे ंतो कैसे दें।
उधर जिला उद्योग विभाग का भी पुरसाहाल नही है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जिला उद्योग केंद्र के लिए केवल पांच लोगों को स्वरोजगार स्थापित करने हेतु ऋण सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जाहिर है कि इस नगण्य लक्ष्य से बेरोजगारों की फौज अपनी मदद के लिए कोई आशा नही रख सकती। इसलिए शिवदान सिंह भदौरिया के मार्फत प्रसारित इस जानकारी के बाद जनपद में बेरोजगारों के बीच असंतोष का प्रचंड बबंडर उठ पड़ा है जो सन्निकट लोकसभा चुनाव में सत्ता पक्ष को भारी पड़ने वाला है।

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