
- निंदा प्रस्ताव पारित कर न्यायालय के बहिष्कार का लिया फैसला
* मामला 151 की वेल खारिज करने और वकीलों के लिये कथित रूप से अपशब्द कहने का
कोंच-उरई । बारसंघ कोंच ने एसडीएम के काम काज पर कड़ी नाराजगी जताते हुये शनिवार को उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने बैठक करके एसडीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया और सर्व सम्मति से फैसला लिया कि आज से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार किया जायेगा। पूरा मामला 151 की एक वेल खारिज करने का बताया गया है। इसी के साथ अधिवक्ताओं ने एसडीएम पर यह भी आरोप जड़ा है कि उन्होंने अधिवक्ताओं के लिये अपशब्दों का इस्तेमाल किया जिससे अधिवक्ता वर्ग आहत है। बारसंघ के बरिष्ठ अधिवक्ता रामशरण सिंह कुशवाहा लिखित रूप में बारसंघ के संज्ञान में यह मामला डाला गया था जिस पर बारसंघ की आमसभा की आपात बैठक बुलाई गई थी।
अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा के केन्द्र में आये एसडीएम कोंच लल्लनराम के खिलाफ कोंच के वकील लामबंद हो गये हैं। वकीलों ने उनके खिलाफ शनिवार को निंदा प्रस्ताव पारित कर उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। बारसंघ की बैठक यहां विजय बारहदरी में अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ खरे की अध्यक्षता और महामंत्री मोहम्मद अफजाल खान के संचालन में संपन्न हुई। बैठक में बरिष्ठ अधिवक्ताओं कमलेश चोपड़ा, विज्ञान विशारद सीरौठिया, ओमशंकर अग्रवाल, विनोद अग्निहोत्री, रामकुमार खरे, केबी निरंजन, सरनामसिंह यादव, मुश्ताकअली आदि ने कहा कि एसडीएम को 151 की वेल खारिज करने का कोई अधिकार नहीं है, इसके अलावा वे अपनी कोर्ट में 145 के मुकदमे भी नहीं लेते हैं। उनकी इस तरह की कार्यशैली अधिवक्ताओं को हतोत्साहित करने बाली है जबकि अधिवक्ता सबको न्याय दिलाने का अपने दायित्वों का निर्वहन करता है। बार के सभी वकीलों ने एक राय होकर कहा कि एसडीएम की कार्यशैली अधिवक्ताओं के मान सम्मान को आहत करने बाली है लिहाजा उनके कृत्य की घोर निंदा की जाती है। इसी के साथ वकीलों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि वे एसडीएम कोर्ट का उनके आचरण में सुधार नहीं आने तक बहिष्कार करते हैं। इस दौरान केके श्रीवास्तव, संजीव तिवारी, एनुलआरफीन, अवधेश द्विवेदी, राघवेन्द्र आनंद विदुआ, हरीसिंह निरंजन, रामनरेश त्रिपाठी, अंबरीश रस्तोगी, भानु जाटव, श्रीराम गुप्ता, अवधेश नगाइच, कुलदीप सौनकिया, ओमप्रकाश कौशिक, वीरेन्द्रसिंह जाटव, शौकतअली, प्रमोद गुप्ता, मलखानसिंह निरंजन, केदारीलाल पाठक सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे।






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