उरई। शिशु मृत्यु दर में स्तनपान को बढ़ावा देकर कमी लाई जा सकती है। 7 अगस्त से विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसमें माताओं को अपने बच्चे को पांच वर्ष की उम्र तक स्तनपान कराने के लिए जागरूक किया जायेगा। इस बार स्तनपान सप्ताह के कार्यक्रम की थीम स्तनपान जीवन की नीव रखी गई है।
यह जानकारी एक पत्रकार वार्ता में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अल्पना बरतारिया ने दी। उन्होंने बताया कि स्तनपान शिशु का मौलिक अधिकार है। यह शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए सर्वोत्तम आहार है। शिशु को डायरिया, निमोनिया व कुपोषण के प्रकोप से इसके जरिये बचाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि स्तनपान को बढ़ावा देने से बच्चों की मौत में 13 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा मां को भी स्तन कैंसर से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे पांच वर्ष तक के 82 लाख बच्चे दुनियां भर में बचाये जा सकते हैं। देश में 1 लाख 56 हजार और प्रदेश में 64 हजार 350 बच्चे मौत के मुंह में जाने से बचाये जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1 घंटे के अंदर स्तनपान की दर मात्र 22.5 प्रतिशत है जो काफी कम है। 6 माह तक केवल स्तनपान की दर 62.5 प्रतिशत है जो कि अन्य प्रदेशों से काफी कम है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बीएम खरे ने बताया कि स्तनपान करने वाले बच्चों की मेधा अन्य बच्चों की तुलना में तीन फीसदी अधिक होती है। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डा. प्रेम प्रताप सिंह परिहार भी उपस्थित थे।






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