
0 सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन लागू करने से परहेज क्योंःमिश्रा
0 वर्तमान में उक्त बिल लाने की कोई आवश्यकता नहीं
उरई (जालौन)। जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव राजेश मिश्रा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुये स्पष्ट किया कि केन्द्र सरकार संसद के चालू मानसून सत्र में एससी/एसटी एक्ट के पूर्व की तरह लागू रखने के लिये संशोधन बिल लाना चाह रही है। देश के सच्चे एवं जागरूक नागरिक होने के नाते मैं यह मानता हंू कि इस संशोधन बिल की कोई आवश्यकता वर्तमान में नही है। माननीय सुप्रीम कोर्ट इस देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। जब उसकी तमाम गाइड लाइन मानी जाती है तो इस एक्ट के प्रति उसके द्वारा दी गयी गाइड लाइन को मानने से वर्तमान सरकार क्यों परहेज कर रही है। कोर्ट ने कोई एक्ट खत्म नहीं कर दिया उसने तो महज इसके प्रयोग के कुछ जरूरी नियम बताये हैं। सुप्रीम कोर्ट की दलील को सही मानते हुये मैं कोर्ट के साथ हंू तथा केन्द्र सरकार द्वारा लाये जा रहे संशोधन बिल का पूरी तरह से विरोध करता हंू।
जालौन रोड स्थित श्री हरि होटल में मीडिया से रूबरू होते हुये कांग्रेस जिला महासचिव श्री मिश्रा ने कहा कि यह सही है कि समाज के दबे कुचले एवं एससी/एसटी वर्ग के लोगों को बराबरी का दर्जा देने एवं उनके आर्थिक उत्थान के लिये देश की पूर्ववर्ती कांगे्रस की सरकार में एससी/एसटी एक्ट लागू किया गया था। एक्ट लागू करने के प्रति सरकार एवं उनके नुमाइंदों की मंशा बिल्कुल सही एवं साफ थी। पर अफसोस इस बात का है कि इस एक्ट के तहत जितना भला वास्तविक पीड़ितों का नहीं हुआ उससे ज्यादा इसका दुरुपयोग हुआ। किसी विवाद का बदला इस एक्ट की ढाल बना कर सवर्ण एवं पिछड़े वर्ग जाति के लोगों से बदला लेने एवं उन्हें जेल पहुंचाने की एक तरह से होड़ सी इस वर्ग के लोगों में लग गयी थी। अधिवक्ता अजय द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब बसपा की सरकार थी उस समय इस एक्ट का दुरुपयोग कैसे हुआ यह पूरा प्रदेश जानता है। इसे रोकने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है उसका पूरे देश में स्वागत हुआ था तथा लोगों ने देश में कानून के राज होने की बात पर संतोष व्यक्त किया था। जो लोग पूर्व में इस एक्ट के तहत झूंठे मामले में जांच न होने के कारण अकारण ही सजा पा चुके उन्होने भी उच्चतम न्यायालय की इस दखल पर प्रसन्नता जाहिर की थी। दुर्गेश गुप्ता गोपालपुरा ने कहा कि मेरा भी मानना है कि एससी/एसटी वर्ग के किसी भी व्यक्ति पर होने वाले उत्पीड़न का मामला दर्ज हो तथा सजा भी पहले से ज्यादा का प्राविधान हो जाये पर इसके पहले इस बात की भी जांच होनी चाहिये कि जो घटना वह व्यक्ति खुद को बतौर पीडित बता रहा है वह वास्तव में हुयी भी है या नही। घटना की जांच सक्षम अधिकारी से करा ली जाये उसके बाद मामले दर्ज हों तो भी दोषी बच नही पायेगा लेकिन बेगुनाह सजा पाने से बच जायेंगे। प्रदीप सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार महज एक वर्ग विशेष को वोट के लिये अपनी ओर आकर्षित करने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा संसद में लाये जा रहे एससी/एसटी एक्ट संसोधन बिल का मैं तमाम समर्थकों के साथ पूरी तरह से विरोध करता हूं तथा आपसे अनुरोध करता हंू कि संविधान में निहित शक्तियों का प्रयोग कर इसे रोकने के लिये जरूरी कदम उठायें। वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस महासचिव राजेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार के इस निर्णय का हर स्तर पर डटकर विरोध करेंगे फिर इसका परिणाम कुछ भी हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में बनाये गये ज्ञापन की एक काॅपी महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित सोमवार को जिलाधिकारी को सौंपेगे।






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