उरई। डिस्पोजल क्राकरी की अचानक बंदी से घाटे में फंसे इससे जुड़े व्यापारियों ने सोमवार को प्रदर्शन करके जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन दिया। व्यापारियों के साथ नगर पालिकाध्यक्ष अनिल बहुगुणा भी थे।
प्रदर्शन में शामिल व्यापारी मनीष माहेश्वरी ने कहा कि डिस्पोजल क्राकरी को बंद करने का मात्र एक माह का समय दिया गया है। इतने कम समय में व्यापारी अपने स्टाक को किसी कीमत पर नही खपा सकते। इसके अलावा इस समय ऐसा सीजन भी नही है जिससे बाजार में डिस्पोजल क्राकरी की बड़ी डिमांड हो।
राजकुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार व्यापारियों को प्रोत्साहित करने की घोषणा करती है। तांकि अर्थव्यवस्था का पहिया गतिशील रहे और लोगों को रोजगार मिलता रहे। लेकिन डिस्पोजल क्राकरी की बंदी के अप्रत्याशित फैसलें से कई व्यापारी बर्बाद हो जायेगें। जो कि सरकार की इस नीति के विरुद्ध है। मो. शाजिद खान ने कहा कि डिस्पोजल क्राकरी व्यवसाय में प्रतिबंध से लाखों लोगों का रोजगार छिन जायेगा जिससे भुखमरी बढ़ेगी। साबिर जालौन ने कहा कि डिस्पोजल क्राकरी के विकल्प में जो उपाय अपनाये जायेगें उससे तो पर्यावरण और बिगड़ेगा। कागज के गिलास बनेगें तो अधिक पेड़ काटने पड़ेगें। मिटटी का कुल्हड़ चलेगा तो खनन बढ़ेगा और भूमि बंजर होगी। पत्तल के लिए पत्ते तोड़ने से वन खत्म हो जायेगें। शरद अग्रवाल ने कहा कि डिस्पोजल के सामान ग्लास, कटोरी आदि की शत-प्रतिशत रिसाक्लिंग होती है। जिसे कि मेज, कुर्सी, बाल्टी, मग आदि बनाने में प्रयोग में लाया जाता है। इसलिए डिस्पोजल क्राकरी से उतना ज्यादा नुकसान नही है। मोहन और अनूप पत्तल वाले ने कहा कि सरकार ने अपनी सनक में व्यापारियों को बर्बाद करने की मंशा न त्यागी तो उसे चुनाव में इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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