उरई। जालौन में कोटेदार द्वारा फर्जी अंगूठे लगाकर राशनकार्डों की सामग्री हड़पे जाने के मामले का खुलासा आखिरकार हो गया। लेकिन पहले जब सिकरीराजा निवासी धर्मेंद्र सिंह राजावत ने आईआरजीएस पर इसकी शिकायत की थी तो फर्जी बाड़े में हिस्सा मिलने की वजह से पूर्ति विभाग ने ही जांच में शिकायत को रफादफा कर दिया था।
बताया जाता है कि चाहे मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत की जाये या प्रधानमंत्री के पोर्टल पर उनका निस्तारण कागजी होता है जिससे घोटालों पर अंकुश नही हो पा रहा है। यह रवैया एक परंपरा का रूप ले चुका है। यही जालौन कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सिकरीराजा निवासी धर्मेंद्र सिंह राजावत की शिकायत पर हुआ। उन्होंने पहले ही खुलासा किया था कि राशनकार्डों को आधार कार्ड से लिंक किये जाने में टालमटोल की जा रही है। क्योंकि गांव के जो लोग पलायन कर चुके हैं उनके नाम से राशनकार्ड बनवाकर खुद ही अंगूठा लगाकर कोटेदार उनकी सामग्री हड़प रहे हैं। लेकिन उनकी शिकायत में कोई गंभीरता नही दिखाई गई। जैसा कि आईआरजीएस की हर शिकायत में होता है निस्तारित लिखकर उन्हें खामोश कर दिया गया। जिसमें यह स्पष्ट नही था कि क्या निस्तारित हुआ है। उनकी शिकायत गलत ठहरा दी गई है या शिकायत सही मानकर कोटेदार पर कार्रवाई की जा रही है।
अगर शासन द्वारा निर्धारित शिकायती मंच पर आने वाले प्रार्थना पत्रों की गंभीरता से जांच की प्रणाली अपनाई जाये तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश हो सकता है। लेकिन पता नही क्यों सरकार इस पर गौर नही कर रही।

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