लखनऊ। आखिर शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे ही दिया है। इसके पहले कुछ महीनों पूर्व सैफई परिवार का मिलन हुआ था जिसमें अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव के पैर छुए थे। इसमें दिखाई गई सहृदयता के बाद सैफई परिवार का मनमुटाव खत्म हो जाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद शिवपाल को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजे जाने की अटकलें शुरू हो गई थीं।
लेकिन हफ्ता दर हफ्ता गुजरते गये फिर भी अखिलेश शिवपाल पर नही पसीजे। कहा जाता है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। इसी तर्ज पर विमाता के साथ मिलकर शिवपाल ने शुरू में अखिलेश को पार्टी में हासिये पर करने का जो तानाबाना बुना था उसे अखिलेश भूले नही हैं। इसलिए वे शिवपाल को मौका देकर फिर किसी साजिशी चक्रव्यूह का फंदा अपने इर्दगिर्द नही कसने देना चाहते। उस पर राजगुरू की भूमिका निभा रहे रामगोपाल यादव दिखावा चाहे जितना करें लेकिन उनके मन में भी शिवपाल को लेकर जो फांस बनी हुई है वह निकल नही पाई है। इसलिए अगर अखिलेश पसीजना भी चाहें तो रामगोपाल ऐसा नही होने दे सकते।
जाहिर है कि शिवपाल यादव लोकसभा चुनाव की बेला जैसे-जैसे सन्निकट आ रही थी अखिलेश के रुख से अधीर होते जा रहे थे। लेकिन करते भी क्या। क्योंकि भाजपा में सीधे उनकी इंट्री ली नही जा रही थी। भाजपा के रणनीतिकार महसूस करते थे कि शिवपाल को पार्टी में शामिल कराने से जनमानस के बीच पार्टी सवालों से घिर सकती है। इसलिए शिवपाल का दूसरे तरह से इस्तेमाल करने का विकल्प भाजपा के रणनीतिकारों के दिमाग में घूम रहा था।
इस बीच अचानक मुलायम सिंह ने सार्वजनिक रूप से फिर यह कह दिया कि उन्हें जीते जी पार्टी में सम्मान नही मिल रहा है। इससे शिवपाल सिंह को एक बार फिर नया हौसला मिला। लोहिया ट्रस्ट की मीटिंग के दौरान शिवपाल ने मुलायम सिंह की नब्ज टटोली जिसमें उनकी हरी झंडी मिलने के बाद ही बुधवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी पार्टी सेकुलर बनाने का धमाकेदार एलान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वे भाजपा में शामिल नही होने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा से उनकी प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई राजनैतिक दोस्ती होने वाली नही है। इसकी बजाय वे छोटी-छोटी पार्टियों को जोड़कर अपने सेकुलर मोर्चे को भाजपा का सबसे सशक्त विकल्प बनायेगें।
लेकिन बात इतनी आसान नही है। मुलायम सिंह परिवार और पुत्र के हितों की रक्षा के मामले में देहाती परिवार के खांटी मुखिया की तरह व्यवहारिक बुद्धि का परिचय शुरू से देते आये हैं। वे कितने बड़े नाटककार हैं यह पार्टी में कब्जे की लड़ाई के समय जाहिर हो गया था जब ऐन मौके पर वे चुप बैठ गये और अमर सिंह और शिवपाल के सारे अरमान धरे रह गये थे। अमर सिंह ने इसे मुलायम सिंह की बड़ी दगाबाजी के रूप में संज्ञान में लिया और तब से वे मुलायम परिवार के खिलाफ भड़ास निकालने में जुटे हैं।
उन्हीं अमर सिंह का गुस्सा जब आजम खां की हरकत की वजह से सारी सीमाएं तोड़कर प्रगट हुआ तो अनहोनी भांपकर मुलायम सिंह ने फिर एक चरखा दांव इस्तेमाल किया जो उनके इस बयान के रूप में सामने आया कि उन्हेें जिंदा रहते कोई सम्मान नही मिल रहा है। दरअसल सपा-बसपा गठबंधन को उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के दौरान जो सफलताएं मिली हैं उससे भाजपा का इंद्रासन डोल गया है। नतीजतन लालू परिवार की तरह मुलायम परिवार को भी कानूनी शिकंजे में चुनाव के पहले जकड़ने का तानाबाना बुना जा रहा था। इसमें अमर सिंह की भूमिका मुलायम परिवार के लिए बहुत घातक हो सकती थी। क्योंकि अखिलेश से लेकर साधना गुप्ता, प्रतीक यादव तक के सभी के अकूत वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन पनामा जैसे द्वीपीय देशों में अमर सिंह ने किया है। यह रहस्य अगर उन्होंने भाजपा की सरकार को सौंप दिये तो मुलायम सिंह ने जितनी मेहनत से कई पीढ़ियों के लिए अपने परिवार का मजबूत किला बनाया है उसे धसकने में देर नही लगेगी। इसलिए मुलायम बीजेपी को सकारात्मक संदेश देने के लिए आगे आ गये। उनके सम्मान न मिलने के बयान से सपा की मजबूती में दरार आई है। इसके बाद शिवपाल का मोर्चा भी भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे में भूमिका अदा करेगा। चुनाव के पहले अपनी ही पार्टी को अंदरूनी उठापटक में फंसाकर भाजपा विरोधी तेवरों की हवा निकालने का जो काम मुलायम सिंह कर रहे हैं उसका इनाम सरकार उनके पूरे परिवार को बख्शने के रूप में उदारतापूर्वक देगी। काफी पहले से मुलायम सिंह ने स्थितियों को भांप रखा था इसलिए उन्होंने मोदी के साथ व्यक्तिगत स्तर पर ऐसे रिश्ते बना लिये थे कि उत्तर प्रदेश में सरकार बदल जाने के बावजूद उनके परिवार पर रहम होता रहा। इसलिए भाजपा जब तक मुलायम सिंह है अपने प्रति उनकी हमदर्द कोशिशों की वजह से उनका लिहाज जरूर करेगी। मतलब साफ है कि अखिलेश से लेकर मुलायम सिंह के घर के हर व्यक्ति को राजनैतिक प्रतिद्वंदिता के बावजूद भाजपा के राज में किसी तरह के व्यक्तिगत संकट की चिंता नही करनी चाहिए।






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