उरई। क्षय रोगी खोजी अभियान के तहत मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शनिवार को मीडिया वर्कशाप का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अल्पना बरतारिया और जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सुग्रीव बाबू ने संबोधित किया।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि क्षय रोग घातक और संक्रामक बीमारी है। जिसके रोगियों की संख्या दवाओं का नियमित सेवन न करने की वजह से बढ़ती जा रही है। यह प्रवृत्ति प्रधानमंत्री के 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के सपने में सबसे बड़ी बाधा है। भारत सरकार ने अब सक्रिय क्षय रोगी खोजी अभियान शुरू किया है तांकि सभी क्षय रोगियों को खोजकर उन्हें कारगर इलाज प्रदान किया जा सके। इस अभियान से भारत को टीवी मुक्त करने का संकल्प साकार हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि उक्त अभियान के लिए जनपद में 67 टीमें बनाई गईं हैं। प्रत्येक टीम में आशा, आंगनवाड़ी, एएनएम तथा एनजीओ के प्रतिनिधि सहित तीन सदस्य शामिल हैं। टीमों की मानीटरिंग के लिए सुपरबाइजर नियुक्त किये गये हैं। प्रत्येक ब्लाक में चिकित्साधिकारी को इसके लिए नोडल चिकित्साधिकारी बनाया गया है। टीम के सदस्यों को डेढ़ सौ रुपये प्रतिदिन की दर से 10 दिन का भुगतान किया जायेगा। क्षय रोगी खोजने पर उन्हें दो सौ रुपये अतिरिक्त दिये जायेगें। अभियान में लगे सुपरवाइजर को तीन सौ रुपये प्रतिदिन और लैब टैक्निीशियन को 100 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जायेगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सुग्रीव बाबू ने बताया कि यह अभियान 4 सितंबर से 14 सितंबर तक चलाया जाना है। टीमों द्वारा 10 दिन तक घर-घर भ्रमण करके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जायेगी। टीबी के लक्षण पाये जाने पर तुरंत बलगम की जांच कराकर दो दिन के अंदर इलाज शुरू कर दिया जायेगा।

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