उरई। नौजवान भारत सभा और बिगुल मजदूर दस्ता के संयुक्त तत्वावधान में देश के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकार कर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की फर्जी मामलों में गिरफ्तारी और छापों के खिलाफ अम्बेडकर चैराहा पर युवकोें द्वारा रविवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
इस दौरान नौजवान भारत सभा के बृजेश ने कहा कि गत 28 अगस्त को देश भर में जानेमाने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के घरों पर छापे मारे गये और पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिनमें सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्नोन गोंसल्वेज, वर्वरा राव और अरुण फरेरा शामिल है। इन पर भीमा कोरेगांव की घटना से जुड़े होने व प्रधानमंत्री को मारने की साजिश करने के आरोप लगाते हुए पुणे पुलिस ने राजद्रोह एवं यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत इनको गिरफ्तार किया है। गोदी मीडिया द्वारा ’अर्बन नक्सल’ का काल्पनिक शत्रु खड़ा कर हर जन पक्षधर आवाज के भीतर डर कायम करने की कोशिश की जा रही है। हमें इनके नापाक इरादों का और जोरदार तरीके से प्रतिरोध करना चाहिए।
संतोष ने कहा कि आज देश भर में जहाँ एक ओर जनता के आन्दोलनों का दमन किया जा रहा है वहीं हत्यारे, बलात्कारियों और भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने वालों को माला पहनाई जा रही है। इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं, दलितों-अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है, देशी-विदेशी पूंजी द्वारा संसाधनों की लूट को कानूनी तौर पर वैध बनाया जा रहा है, किसानों से उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं, बेरोजगारी और भुखमरी चरम पर है, जनता के बीच धर्म, भाषा और क्षेत्र के नाम पर जहर बोया जा रहा है। इन सबके खिलाफ उठने वाली इंसाफ पसंद और प्रगतिशील आवाजों को दबा देने की मुहिम भी सरकार द्वारा चलाई जा रही है। लेकिन फांसीवादी हमेशा भूल जाते हैं कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है। हम सरकार की इस हताशापूर्ण और कायराना हरकत की कड़े शब्दों में भत्र्सना करते हैं और मांग करते हैं कि इन कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाय और भीमा कोरेगांव की घटना के मुख्य आरोपियों संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को तुरंत गिरफ्तार करके उन पर मुकदमा चलाया जाये। यशवंत ने बताया कि यह सब सिर्फ एक दिनी प्रदर्शन से नहीं होने वाला है और न ही संविधान और कानून की दुहाई देकर फांसीवादियों का हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। हमें आम जनता के बीच जाकर इनकी पोल खोलनी होगी और गली-मोहल्लों से फांसीवादियों को धकेलकर बाहर निकालना होगा। फासीवादियों की हर बर्बरता पर चुप्पी तोड़कर संगठित प्रतिरोध खड़ा करना होगा।
कार्यक्रम में अतुल, उदित, संतोष, बृजेश, यशवन्त, लक्ष्मी आदि लोग शामिल रहे।






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