निर्माणाधीन पुल के लेंटर में आने लगी दरारें, जेई ने करा दी टीपटाप

 

महेबा-उरई। भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग का शायद ही इससे अच्छा उदाहरण कोई और देखने को मिले जो इन दिनों महेबा ब्लाक के गांव पाल सरैनी के पास यमुना नदी पर बन रहे पुल पर देखने को मिल रहा है। पुल अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हो पाया है और अभी से उसके लेंटर में दरारें पडऩी शुरू हो गई हैं। हद तो तब हो जाती है जब अपनी करतूतों के छिपाने के लिए मानकों का ध्यान रखने के बजाय जेई साहब ने उन्हीं दरारों की टीपटाप कराने में भी गुरेज नहीं किया।

गौरतलब है कि पाल सरैनी के पास यमुना नदी के पुल का निर्माण कार्य तकरीबन आठ साल पहले बसपा सरकार में शुरू हुआ था। कच्छप गति से चल रहे निर्माण के कारण अभी तक पुल का कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्माण में ही इतना लंबा समय बीत जाने के बाद यह पुल निर्मित होने के बाद कितने दिन तक टिक सकेगा अब इसको लेकर भी संशय मंडराने लगा है। ग्रामीणों द्वारा पुल निर्माण में मानकों की अनदेखी की कई बार की गई शिकायतों की सच्चाई अब उक्त निर्माणाधीन पुल खुद बयान करने लगा है। पाल गांव से पुल पर चढते समय खोटी नंबर दो और तीन के बीच के लैंटर में एक-एक मीटर की लम्बाई से एक-एक इंच चौड़ी दरारें निर्माण में की जा रही अनियमितताओं की कहानी बयान कर रही हैं। ऐसे में अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया और इसी प्रकार पुल बनकर तैयार हो गया तो जब इस पर टनों भारी वाहन गुजरेंगे तो क्या हाल होगा इसका अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है। बावजूद इन सब आशंकाओं और जनहित की जिम्मेदारियों से बेपरवाह जेई मानकों को ताक पर रख कर काम कराने में जुटे है। लेंटर में आई दरारों के बाद अपनी नाकामी को छिपाने का पूरा प्रयास करते हुए जेई धर्मेंद्र ने इन्हीं दरारों की टीपटाप कराकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली। जब इस बारे में पुल पर काम करने वाले लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जेई साहब को साइड पर आने की फुरसत ही नहीं रहती है वह कभीकभार ही यहां आते हैं। जब  उपपरियोजना निदेशक वीके जैन से बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं थी कि वह खुद जाकर इसको देखेंगे और जो स्थिति होगी उसी के अनुसार कार्रवाई अमल में लाएंगे।

इनसेट–

जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूर

अब इसे लापरवाही की हद ही कहा जा सकता है कि पुल निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की जान की भी परवाह नहीं की जा रही है। बिना किन्हीं सुरक्षा उपकरणों के निर्माण कार्य में लगे मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर पुल निर्मित करने में लगे हैं। उनके सिर पर न तो हैलमेट हैं और न ही कमर में सेफ्टी बेल्ट। एेसे में घटिया मानकों से निर्मित किया जा रहा पुल जब बनकर तैयार होगा तब होगा लेकिन मजदूरों के साथ अगर कोई घटना घट गई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। पुल निर्माण में लगे राजेन्द्र कन्झौसा ,पवन बांदा ,कोमल कन्झौसा, अनरूद्ध,और ओमप्रकाश कन्झौसा ने बताया कि यमुना नदी खतरे के निशान के करीब बाड़ पर है।

 

 

 

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