झाँसी-   बुंदेलखण्ड किसान समृद्घि अभियान ट्रस्ट के तत्वाधान में 21 से 26 सितम्बर तक छह दिवसीय शून्य लागत प्राकृतिक आध्यात्मिक खेती शिविर का आयोजन झाँसी के पेरामेडीकल कॉलेज में होगा। प्राकृतिक कृषि अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक गोपाल उपाध्याय ने बताया कि किसानों को अपने खेतों में शून्य लागत जीरो बजट अभियान को अपनाना चाहिए। भारत में हरित क्रांति के नाम पर अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों, हानिकारक कीटनाशकों, हाईब्रिड बीजों एवं अधिकाधिक भूजल उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति, उत्पादन, भूजल स्तर और मानव स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आ रही है। किसान बढ़ती लागत, बाजार पर निर्भरता एवं सरकार की कृषि विरोधी नीति के कारण खेती छोड़ रहे है और आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो रहे है। कस्बा में पत्रकारों से चर्चा करते हुये उन्होंने कहा कि विदेशी तकनीक जैविक खेती ( बर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट बायोडायनामिक) भी जटिल होने के कारण अंतः किसान को बाजार पर ही निर्भर रहता है। किसानों को आवश्यकता है कि ऐसी कृषि पद्घति को अपनाये जिसमें किसान को बार-बार बाजार न जाना पड़े, उत्पादन भी न घटे, खेत उपजाऊ बने रहे  एवं मानव निरोगी रहे। गोपाल उपाध्याय ने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाने से खेत के लिए बाजार से कुछ भी नहीं खरीदना होता है। इस पद्घति के प्रणेता पदमश्री सुभाष पालेकर (अमरावती महाराष्ट्र) ने एक ऐसी विधि  को जन्म दिया है, जिसमें हर किसान एक देशी गाय पालेगा, उसके गोबर और गोमूत्र का उपयोग कर प्राकृतिक खेती का संसाधन-जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, ब्रहमास्त्र, नीमास्त्र, अग्नियास्त्र, फफूंदी नाशक, दशपर्णी अर्क आदि बनायेगा और पुरी तरह से जहर मुक्त खेती करेगा। इस पद्घति में प्रत्येक किसान को एक देशी गाय की जरुरत पड़ेगी। देश में 14 करोड़ किसान परिवारों के यहां अगर एक-एक गाय उपलब्ध करा दी जायें तो सड़कों पर आवारा जानवर के रुप में गाय दिखाई नहीं देगी। प्राकृतिक खेती कर सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन जीवामृत है, जिसमें दस किलो देशी गाय का गोबर व पांच से दस लीटर गोमूत्र, एक से दो किलो गुड़, एक से दो किलो दलहन का आटा, एक मुट्ठी (100 ग्राम) जीवाणु युक्त मिट्टी, दो सौ लीटर पानी को एक ड्रम में मिलाकर ड्रम को जूट की बोरी से ढककर सुबह-शाम डण्डा से घड़ी की सुई की दिशा में घोले। 48 घण्टे बाद छानकर 7 दिन के अंदर ही प्रयोग करें। इससे फसल उत्पादन में चमत्कार होगा। एक देशी गाय तीस एकड़ तक जहर मुक्त खेती बनाने की क्षमता रखती है।शिविर समन्वयक आचार्य योगर्षि अविनाश ने बताया कि पेरामेडीकल कॉलेज में लगने वाले छह दिवसीय शिविर में पन्द्रह सौ  किसान भाग लेंगे।  उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र के किसान शिविर में भाग लेंगे। शिविर में सुभाष पालेकर द्वारा दी जाने वाली जानकारी किसानों के लिये अमृत के समान होगी। किसानों का पंजीकरण शुरु हो गया है। समूचे बुंदेलखण्ड के किसान शिविर में खेती की आधुनिक जानकारी प्राप्त करेंगे। आयोजन को सफल बनाने के लिये कैलाश अग्रवाल एवं चन्द्रभान राय को सह समन्वयक, विधायक राजीव सिंह पारीछा को कार्यक्रम संयोजक, कुंजबिहारी गुप्ता एवं राजेश बंसल को सह संयोजक, प्रदीप सरावगी को सर्व व्यवस्था प्रमुख, सुशील एवं नितिन चौरसिया सह सर्व व्यवस्था प्रमुख, श्याम बिहारी गुप्ता को सम्पर्क प्रमुख, विभुकांत शाह को कोष प्रमुख, राजकुमार द्विवेदी एवं कुमारी खुशबू को पंजीकरण प्रमुख, अवधेश प्रताप सिंह लल्ला को यातायात प्रमुख, प्रदीप शरण अग्रवाल एवं अयोध्या प्रसाद कुशवाहा को भोजन व्यवस्था प्रमुख, बृजेन्द्र तिवारी को आवास प्रमुख, डॉ. एस.आर. गुप्ता, राजेश पाठक, आर.पी गुप्ता को मीडिया प्रमुख बनाया गया है। पत्रकारवार्ता में संस्थान से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।

 

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