उरई। जल स्तर बढ़ने से जनपद के पचनद क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में दहशत फैल गई है। पचनद संगम के दोनों तट उफनती जलधारा में समा गये हैं।
रविवार से ही काली सिंध नदी में पानी बढ़ने के कारण पचनद में बाढ़ ने विकराल रूप धारण शरू कर लिया था। गनीमत यह है कि चंबल का जल स्तर स्थिर है। अन्यथा पचनद की बाढ़ बेहद विनाशकारी साबित हो सकती थी।
सोमवार को दोपहर बाद तीन बजे तक पचनद के दोनों तट पर 950 मीटर तक का क्षेत्र डूब चुका है। जो सामान्य से 300 मीटर अधिक है। पचनद संगम में लहरों के लगातार ठाटे मारने से आसपास के बाशिंदे सहर उठे हैं। इलाके में 1972 और 1996 के जल प्लावन की चर्चा होने लगी है। नबाव सिंह परिहार बताते हैं कि जल प्लावन ने इतना भयंकर रूप धारण कर लिया था कि कालेश्वर मंदिर के पास के पीपल के ऊपर के पत्ते मात्र दिखाई दे रहे थे जबकि पेड़ का कुछ पता नही चल रहा था। स्थानीय आबादी विश्राम घाट पर बने तीन बुर्ज, ऊपर बनी सीढ़ियों और इसके ऊपर 12 द्वारी को देखकर बाढ़ की भीषणता को मापते हैं। वर्तमान में बुर्ज डूब चुके हैं इसके बाद सीढ़ियां भी डूब गई हैं केवल ऊपर चार सीढ़िया बची हैं। ग्रामीण ईश्वर से प्रार्थन कर रहे हैं कि पचनद संगम में अब और अधिक जल प्लावन न हो।






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