जल का अधिकार, स्वच्छता और महिलाओं से जुड़े मुददे पर लखनऊ की मशहूर संस्था वात्सल्य ने बैंक आफ अमेरिका के सौजन्य से गत 7 और 8 सितम्बर को मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओरछा में उत्तर प्रदेश भर के मीडिया कर्मियों की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित कराई। इस विमर्श में जहां लोगों को जागरूक करने में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वहीं संबंधित मुददो को लेकर सरकारी कार्यक्रमों की जमीनी हकीकत को भी सामने लाया गया।
विमर्श के दौरान ओडीएफ को लेकर इस बात पर सर्व सम्मति थी कि सरकार ने इसकी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नही दिया। जिसके कारण यह काम हड़बड़ी में हो रहा है। लैट्रिन बनाने की एक पूरी व्यवस्था है। पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित लोग इसके लिए होना चाहिए थे। लेकिन सरकार तय कर चुकी है कि जैसे भी हो 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन तक सारे देश को ओडीएफ घोषित कर दिया जाना है। अंदेशा यह है कि इस जल्दबाजी की वजह से अधिकांश शौचालय ऐसे हो सकते हैं जो अनुपयोगी साबित हों। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि सरकार चाहे तो अभी भी इस विसंगति को संज्ञान में लेकर 25 दिसंबर तक का समय बढ़ा सकती है। तांकि कुछ ढंग से काम कराया जा सके। 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती है। यह तारीख भी एक अच्छा उपलक्ष्य है।
चर्चा के दौरान पत्रकारों ने बताया कि किस तरह खुले में शौच मुक्त के अभियान में कमीशन खोरी भी हो रही है। इसके कारण ऐसे लोग भी प्रोत्साहन राशि लेने में सफल हो रहे हैं जिनके घरों में साधन सम्पन्न होने की वजह से पहले से शौचालय हैं। दूसरी तरफ स्थिति यह भी है कि प्रोत्साहन राशि का पैसा सीधा लाभार्थी के खाते में पहुंच रहा है। जिसके कारण वह प्रधान के मिन्नत करने के बाद भी शौचालय बनवाने में आनाकानी कर रहा है। प्रधान उसके खिलाफ एफआईआर कराकर अपने लिए राजनैतिक जोखिम मोल नही लेना चाहता। शौचालय और उसके गडढे के अंधाधुंध डिजाइन पर भी चर्चा केंद्रित हुई। बताया गया कि स्कूलों में शौचालय तो बने हैं लेकिन उन्हें बच्चो के लिए खोला नही जाता। इस विषय में चर्चा की परिणति इस रूप में हुई कि लोगों के व्यवहार परिवर्तन पर भी फोकस किया जाये तभी स्वच्छता अभियान अपनी तार्किक परिणति पर पहुंच सकेगा।
जल के अधिकार को लेकर चर्चा के दौरान यह बात प्रकाश में आई कि जल ही जीवन होने की वजह से इससे वंचित किया जाना संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित जीवन के मौलिक अधिकार की अवहेलना है। फिर भी यह हो रहा है। सार्वजनिक हैंडपंपों पर निजी आधिपत्य के कारण गांवों में तमाम आबादी पानी लेने के अधिकार से वंचित की जा रही है। फिर भी सरकार और प्रशासन ऐसे दबंगों पर कार्रवाई करने को इच्छुक नही दिखती।
वात्सल्य की डा. नीलम सिंह ने महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड के उपयोग को लेकर भी कई नई जानकारियां चर्चा के दौरान प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि बाजार में आ रहे सेनेटरी पैड किस तरह महिलाओं के शरीर में खतरनाक रासायनिक संक्रमण के भी कारण साबित हो रहे हैं। मीडिया कर्मियों ने कार्यशाला में बीबीसी के संवाददाता अतुल चंद्रा के मार्ग दर्शन में शौचालय का उपयोग न करने से होने वाली बीमारियों और पानी के अधिकार के संबंध में तात्कालिक समाचार कथाओं का भी प्रस्तुतीकरण भी किया। कार्यशाला के दूसरे दिन अंजलि त्रिपाठी ने भी महत्वपूर्ण प्रजेन्टेशन दिया। अंजनी, भुआल सिंह आदि वात्सल्य की टीम ने दोनों दिन कार्यक्रम के सुचारू संचालन में सार्थक भूमिका निभाई। यह आयोजन ओरछा के पंच सितारा होटल अमर महल में किया गया।






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