उरई। ग्राम्य विकास अभिकरण में अंधेरगर्दी मची हुई है। यह अभिकरण सांसद और विधायक विकास निधि के जरिये होने वाले कार्यों की मानीटरिंग करता है। जिसके लिए इसमें तकनीकी शाखा का प्रावधान किया गया है। लेकिन अपनों पर सितम गैरों पर करम का किस्सा अपनाते हुए विभाग के अधिकारी इस शाखा को पंगु बनाये हुए हैं।
यह बात उस समय चर्चा का विषय बनी जब पता चला कि सांसद और विधायक विकास निधि के जो कार्य आरईडी ने कराये थे उनके क्रास सत्यापन की व्यवस्था को लांघकर विभाग ने नई परंपरा स्थापित की और अपने कार्यों का सत्यापन प्रमाण पत्र खुद ही जारी कर दिया। इसका भंडाफोड़ होने पर मामले को दबाने के लिए डीआरडीए के निर्माण कार्यों का सुपरविजन लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता वीरेंद्र कुमार के हवाले कर दिया गया।
ऐसी हालत में जबकि डीआरडीए की तकनीकी शाखा में खुद एई हैं। उनकी भूमिका दूसरे को सौंपने के औचित्य पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। डीआरडीए के सहायक अभियंता को हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने की तनख्वाह दी जा रही है। क्या इस वजह से कि डीआरडीए में अंदर ही अंदर बड़े घोटाले पकाये जा रहे हैं।






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