उरई। मुख्य विकास अधिकारी अवधेश बहादुर सिंह की अध्यक्षता में पेयजल कार्यक्रम की समीक्षा बैठक विकास भवन सभागार में आयोजित हुई जिसमें जल निगम और जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता और उनके सहायक व अवर अभियंतागण उपस्थित रहे।
बैठक में अमृत पेयजल योजना की समीक्षा बैठक में लाभार्थीवार जल संयोजनों की सूची उपलब्ध न कराने पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी प्रकट की। उन्होंने जल निगम के अधिशाषी अभियंता को निर्देश दिया कि जल संस्थान को यह सूची तत्काल भेजें तांकि उनसे जल मूल्य वसूली शुरू कराई जा सके। योजना के तहत शहर में 2377 लोगों को पेयजल कनेक्शन दिये जाने थे जिनमें से 1750 को कनेक्शन दे दिये गये हैं।
बैठक में जल निगम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में विधायकगणों के 435 हैंडपंप लगाने का लक्ष्य था। जिनमें से 357 हैंडपंप स्थापित कराये जा रहे हैं। 8 हैंडपंप पठारी क्षेत्र में होने के कारण विद्युत यांत्रिक शाखा झांसी को संदर्भित कर दिये गये हैं। लेकिन पठारी क्षेत्र के स्टीमेंट में 40 हजार रुपये का अंतर होने की वजह से यांत्रिक शाखा ने कार्य कराने में असमर्थता प्रकट की है। 8 हैंडपंपों को लेकर विवाद की वजह से उनका स्थल परिवर्तन किया गया है।
उधर बुंदेलखंड विकास निधि के अंतर्गत 121 हैंडपंप लगाने का लक्ष्य है। जिनमें से 72 का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 30 हैंडपंप विधायक कालपी और विधायक माधौगढ़ की सूची न मिल पाने के कारण नही लग पाये हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने इसे लेकर कहा कि स्वीकृत हैंडपंप की बोरिंग का स्थल ठेकेदार मनमानी दिखाकर बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुद अधिशाषी अभियंता को इसे रोकने पर गौर करना होगा। अकनीबा और हरदोई गूजर पाइप्ड पेयजल परियोजनाओं के बारे में बताया गया कि इनका 66 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। जबकि सीएसआर के अंतर्गत गिरथान और मड़ोरा में प्रस्तावित परियोजनाओं का कार्य लगभग 46 प्रतिशत पूरा किया गया है। उन्होंने जल निगम से कहा कि इन परियोजनाओं की पाइप लाइन की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नही की जायेगी। संकलित पाइप पेयजल परियोजना, ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित परियोजना, नगरीय पेयजल परियोजना और नगरीय हैंडपंपों के अधिष्ठापन की प्रगति की भी समीक्षा इस दौरान की गई।

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