उरई। डेढ़ दशक से नेशनल हाइवे पर जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों को निजात दिलाने के लिए प्रशासन अगर कोई ठोस कदम आगे नही बढ़ा रहा था तो उसकी वजह साफ थी। इसमें यह साफ नजर आ रहा था कि अधिकारियों को इसके लिए शिव बनकर विरोध का जहर पीने को तत्पर होना पड़ेगा और आसानी से सूली पर चढ़ने को कोई कैसे तैयार हो सकता है। वर्तमान प्रशासन ने इस चुनौती को स्वीकार कर कालपी के पास अधूरे पड़े फोरलेन के टुकड़े को पूरा कराने का रास्ता तो तैयार कर दिया है लेकिन अब उन्हें भगवान शिव की नियति का सामना करना पड़ रहा है।
कालपी में फोरलेन को पूरा करने में सड़क की जद में आ रहे धार्मिक स्थल सबसे बड़ी रुकावट बन गये थे। 2003 से अभी तक जिले में कितने भी अधिकारी आये, उन्होंने इस रुकावट को खत्म करने की नौटंकियां तो बहुत की लेकिन निर्णायक मंशा बनाकर इसमें कभी हाथ नही डाला। इसलिए कालपी का जाम कानपुर-झांसी नेशनल हाइवे पर यातायात के लिए स्थाई नासूर बन गया था। कुछ महीने पहले मौजूदा अधिकारियों ने इस मामले में ईमानदार मंशा से पहल की। वर्तमान अधिकारियों को भी चेताया गया कि यह मुददा तेल से खौलते कढ़ाह की तरह है जिसमें हाथ डालने की दिलेरी दिखाना समझदारी नही होगी। पर मौजूदा प्रशासन ने इन चेतावनियों की वजह से बैक टु पवेलियन होने की बजाय अपने प्रयासों को अंजाम तक पहुंचाने के इरादे से काम किया। अधिकारियों ने कह दिया कि उनके लिए निजी तौर पर इसके परिणाम चाहे जो हो पर कालपी के जाम की समस्या की वजह से कानपुर-झांसी हाईवे पर सफर करने वाले लोगों और कालपी को बाशिंदों को जिस त्रासदी से गुजरना पड़ रहा है उससे हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी से वे पीछे नही हटेंगे। प्रशासन की यह पुनीत भावना रंग लाई जब 7 सितम्बर को धार्मिक स्थलों के विस्थापन के दौरान न केवल कोई विवाद नही हुआ बल्कि अगले दिन लोगों ने इनका मलवा हटवाने में भी मदद की। इसके साथ ही अधूरी फोरलेन को पूरा करने का काम चल पड़ा। इस कार्रवाई में प्रशासन हीरो बनकर उभरा और तीन दिन तक अधिकारियों की जय-जयकार होती रही।
हालांकि जनपद की लगभग समूची आबादी अभी भी अधिकारियों को इस कामयाबी पर तहे दिल से मुबारकबाद दे रही है लेकिन कुछ लोगों ने इस आपरेशन को विवादों में घेरने की कोशिश शुरू कर दी है। अधिकारियों के साथ-साथ जनमानस भी उन लोगों के करतब पर हतप्रभ था जो आपरेशन सहयोग के दौरान कंधे से कंधा मिलाकर प्रशासन का साथ देने का वायदा कर रहे थे लेकिन अब मीनमेख निकालकर उसे हतोत्साहित करने में कसर नही छोड़ रहे। उनका विरोध प्याली के तूफान की तरह है। लेकिन लोग आशंकित है कि अधूरे फोरलेन को पूरा करने की अंतिम मुहाने पर पहुंच चुकी कार्रवाई कहीं फिर न अटक जाये। प्रशासन की ओर से एक बार फिर स्पष्ट किया गया है कि आपरेशन सहयोग में धार्मिक स्थलों को ठीक उसी तरह विस्थापित किया गया है जैसी कि सर्वसम्मति हुई थी। इसमें किसी तरह की हेराफेरी के संदेह की गुंजाइश का प्रश्न ही नही है। अपर जिलाधिकारी प्रमिल कुमार सिंह ने कहा कि मजार न तोड़ी जाने के बारे में भ्रम अनुचित है। स्वयं उन्होंने इसकी निगरानी की वही एक मजार छोड़ी गई है जिसके विषय में एनएचआई के इंजीनियरों ने कहा था कि उनका काम वहां तक नही जायेगा। उन्होंने कहा कि मां वनखंडी देवी शक्ति पीठ के महंत और अन्य धर्माचार्यों के सामने वस्तुःस्थिति स्पष्ट कर दी जायेगी तो उनका विरोध समाप्त हो जायेगा। जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने कहा कि जिस तरह कार्य किया गया वह सभी के सामने है। लोग प्रशासन के साथ हैं। वे कुछ और कहकर किसी विवाद को तूल नही देना चाहते हैं।

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