उरई। गणेश जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में इंटैक उरई अध्याय द्वारा चूड़ी बाजार स्थित संध्या पुरवार के आवास पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ आदि देव के पूजन के साथ किया गया।
प्रदर्शनी में गुप्त काल से लेकर आधुनिक काल तक की टेरीकोटा, पीतल, तांबें की मूर्तियों के साथ-साथ थाईलैंड, नेपाल आदि देशों द्वारा गणेश जी के चित्रों से सुसज्जित डाक टिकटों का प्रदर्शन भी किया गया। बुंदेलखंड के दतिया राज द्वारा जारी गणेश जी का दुर्लभ टिकट भी इस प्रदर्शनी की शोभा बढ़ा रहा था। मुस्लिम देश इंडोनेशिया के बैंक नोट पर गणेश के चित्र का अंकन दर्शनार्थियों के लिए अचंभित करने वाला था।
प्रदर्शनी प्रभारी संध्या पुरवार ने भी पेंसिल से उनके द्वारा बनाये गये अत्यंत मनोहारी चित्र को इसमें प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि श्री गणेश उत्सव का प्रारंभ सर्वप्रथम शिवाजी द्वारा किया गया। बाद में स्वतंत्रता आंदोलन से आम जनमानस को जोड़ने के लिए लोकमान्य तिलक ने समूचे महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को व्यापकता प्रदान की।
प्रदर्शनी में थाईलेंड, आईबरी कोष्ट आईलेंड, पलाऊ आइलेंड आदि देशों द्वारा जारी गणेश जी के चित्र से युक्त मुद्राओं का और दक्षिण भारत की विभिन्न रियासतों जैसे शिवगंगा, मदुरै, विजय नगर आदि में गणेश के चित्रों से युक्त ताम्र मुद्राओं के साथ-साथ रजत, ताम्र, पीतल आदि के गणेश युक्त टेंपल टोकन्स को भी दिखाया गया। इस अवसर पर प्रदर्शित वस्तुओं के संग्राहक डा. हरीमोहन पुरवार ने कहा कि गणेश का मानव स्वरूप हमें समाज में किस भांति रहना चाहिए एवं अन्य व्यक्तियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए इसका बोध कराता है। उन्होंने यह भी कहा कि गणेश ही वे देव हैं जिन्होंने अपने माता-पिता शंकर-पार्वती की प्रदक्षिणा करके यह संदेश दिया कि प्रथ्वी पर अपने माता-पिता से बढ़कर कोई देव नही है।
प्रदर्शनी में डीवी कालेज के प्राचार्य सहित पूरा परिवार, नगर के तमाम गणमान्य प्रबुद्धजन, भारत विकास परिषद के सचिव व अध्यक्ष, रामश्री पब्लिक स्कूल, बीकेडी एल्ड्रिच पब्लिक स्कूल और मिजपा स्कूल के तमाम बच्चों ने अवलोकन किया। अंत में इंटैक की सदस्या डा. अलका रानी ने सभी का आभार प्रकट किया।






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