उरई। सूबे की सामाजिक तन्जीम मुस्लिम वैल्फेयर एसोसिएशन के जेरे एहतिमाम सरजमीने उरई के मोहल्ला तिलक नगर स्थित पीरो वाली मस्जिद के मैदान बरकाती ग्राउन्ड मे 42वां सालाना दस रोजा (दस दिवसीय) इजलास पैगामे शहीदे आजम की छठी महफिल मुनक्किद (आयोजित) हुई। महफिल का आगाज तिलावते कुरआन से हाफिज फजले अजीम व संचालन डा० मु० नासिर बेग ने किया। इसके बाद कानपुर से आये हाफिज मोनिस चिश्ती, उमैर बरकाती व उरई के वसीम बरकाती ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बारगाह मे खिराजे अकीदत पेश की। इसके बाद फतेहपुर से आये मेहमाने खुसुसी हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती उबैदुर्रहमान साहब ने तकरीर की और वाक्याते कर्बला पर रोशनी डालते हुये बताया कि मैदाने कर्बला मे जब हजरत इमाम हुसैन के जुमला अहबाब व अकरबा (रिश्तेदार और करीबी लोग) जामे शहादत नोश फरमा चुके तो आपके साथ सिर्फ आपके तीन साहबजादों के सिवा कोई न बचा, यह तीन साहबजादें हजरत अली अकबर, हजरत अली असगर और इमाम जैनुल आबदीन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) थे। हजरत इमाम जैनुल आबदीन तो बीमार थे और हजरत अली असगर अभी शीर ख्वार (दुध पीते) ही थे, हजरत अली अकबर की उम्र सिर्फ 18 बरस की थी, हजरत इमाम हुसैन ने जब देखा की अब सिवाए मेरे तीन बच्चों के और कोई बाकी न रहा तो आपने खुद मैदान मे जाने का फैसला कर लिया और सवारी मंगवाई हथियार बदन पे आरास्ता फरमायें और रूख्सत के वास्ते खेमे के अंदर तशरीफ लाये और सब को सब्र की तलकीन की, हजरत अली अकबर यह मंजर देखकर इमाम के कदमो पर गिरे और अर्ज करने लगे अब्बाजान खुदा वह दिन न दिखाये जब की आप मेरे सामने शर्बते शहादत नोश फरमाये, आप मेरे होते हुए मैदान मे क्यों तशरीफ ले जाते है? मुझे इजाजत फरमाइये मै जाता हूं, हजरत इमाम हुसैन ने फरमाया ऐ अली अकबर किस दिल से तुझे मैदाने जंग मे जाने की इजाजत दे दूं किन आंखो से तुझको जख्मों से चूर-चूर देखूं हजरत अली अकबर ने इमाम को कसमें देना और रोना शुरू किया, आखिर मे हजरत इमाम हुसैन ने इजाजत दे दी और अपने हाथ से उनके बदन पर हथियार लगाये जिरह पहनाई अमामा शरीफ सर पर रखा पटका कमर पर बांधा और घोड़े पर बैठा दिया, वहा मौजूद सभी लोग इमाम अली अकबर से आकर लिपट गये, इमाम हुसैन ने सबको हटा कर फरमाया जाने दो की सफरे आखिरत है। आगे मुफ्ती साहब ने फरमाया की हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम बड़े ही साबिर (सब्र करने वाला) व शुक्र और इस्तिकलाल के मालिक थे की 18 साल के अपने लख्ते जिगर को जुल्मो सितम के खिलाफ अल्लाह की राह मे कुर्बान होने के लिये खुद अपने हाथों तैयार फरमाते है और शिकवा शिकायत का कोई लफ्ज तक नही लाते। इसके बाद कानपुर से आये मौलाना मुश्ताक अहमद मुशाहिदी साहब ने तकरीर की और मुसलमानो से पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम की तालीमात पर अमल करने की सलाह दी। इसके बाद सलातो सलाम पढ़ा गया और पूरे मुल्क मे अमन व शान्ति के लिये दुआ की गई फिर मेहफिल का इख्तिमाम (समापन) हुआ और कमेटी के जनरल सेकेट्री शारिक बेग बरकाती ने आये हुये सभी अकीदतमंदो का शुक्रिया अदा किया। महफिल मे मुख्य रूप से अब्दुल रज्जाक, वासिक बेग बरकाती, सै० इस्राफील, तौसीफ रहमानी, हाजी अब्दुल वहाब, मकसूद अहमद, आकिल, कामिल, तालिब, पन्नू, मुख्तार अंसारी, आसिफ, पम्मू, रिजवान, शारिफ, जावेद, दानिश बेग, रईस अहमद, रूमान, वामिक बेग आदि लोग मौजूद रहे।

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