उरई। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में जहां गठबंधन की चर्चाओं का बाजार गर्म है वहीं अंदरखाने दोनों पार्टियां एक-दूसरे के साथ पैंतरेबाजी का भी खेल खेलने में लगी हैं। गठबंधन न हो पाने की संभावना को लेकर समाजवादी पार्टी अघोषित तौर पर बसपा के खाते में जा चुकी लोकसभा सीटों पर भी अपना वजूद मजबूत करने की तैयारियों में जुट गई है। जिससे उसकी रणनीति की एक झलक सामने आ रही है।
सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव भले ही महागठबंधन की वकालत से पीछे न हट रहे हों लेकिन अंदरखाने पार्टी ने अकेले लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। इसी के तहत बहुजन समाजपार्टी के खाते की सीटें मानी जाने वाले क्षेत्रों में भी समाजवादी पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत रखने की कवायद में जुट गई है। जालौन-गरौठा-भोगिनीपुर संसदीय सीट को समाजवादी पार्टी ने अघोषित तौर पर बसपा के खाते में डाल दिया था। लेकिन अब इस सीट पर पार्टी विधानसभा स्तर पर जिस तरह कार्यकर्ताओं के बूथ स्तरीय सम्मेलन पूरे दमखम से आयोजित कर रही है उससे उसकी रणनीति का खुलासा हो रहा है।
जालौन जिले में समाजवादी पार्टी द्वारा हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तर तक पार्टी के कील-कांटे मजबूत करने के लिए चलाये जा रहे अभियान के क्रम में बुधवार को माधौगढ़ के बुंदेलखंड पैलेस में जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के मुख्य आतिथ्य में विधानसभा क्षेत्र स्तरीय सम्मेलन का आयोजन पूरे तामझाम के साथ हुआ। जिसकी अध्यक्षता पार्टी के विधानसभा क्षेत्र समिति के अध्यक्ष अमर सिंह अटागांव ने की जबकि दीपू पतराही ने संचालन किया।
सम्मेलन को पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल, पूर्व विधायक शिवराम कुशवाहा और दयाशंकर वर्मा, पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी केशवेंद्र सिंह, विक्रम यादव, प्रबल प्रताप सिंह, छात्र सभा के अध्यक्ष हिमांशु ठाकुर आदि दिग्गजों ने संबोधित किया।

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